सात समंदर पार से आया एक विदेशी… पंजाब के स्कूल को दिया अनोखा गिफ्ट, मजेदार है कहानी

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चंडीगढ़. पंजाब के एक सरकारी स्कूल में सात समंदर पार से आए एक विदेशी ने ऐसा गिफ्ट दिया कि आप भी उसको सलाम करने से पीछे नहीं हटेंगे. यह पंजाब के संगरूर के एक गांव के सरकारी स्कूल का मामला है, जहां नवंबर 2018 को स्पेन से दिवाली मनाने आया एक शख्स स्कूल की टूटी हुई छतें, दीवारों और बेंचों की तस्वीरें ले रहा था. स्कूल की प्रिसिंपल को इसकी चिंता हुई कि कहीं वह इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर न पोस्ट कर दे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन का रहने वाला शख्स कलाकार और संगीतकार है, जिसका नाम जोर्डी फोर्नीज़ है. उनके दोस्त महिंदर गुज्जर ने 2018 में स्कूली बच्चों के साथ दिवाली मनाने के लिए गोबिंदगढ़ जेजियन गांव में आमंत्रित किया था. स्कूल की प्रिंसिपल सुशील कुमारी कहती हैं कि उस दौरान कक्षा की सभी छतें ढह गई थीं, कोई बेंच नहीं थी, चारदीवारी ढह गई थी और हमारे सभी 98 छात्र ठंड के बावजूद खुले में फर्श पर बैठने को मजबूर थे. मुझे चिंता थी कि यह विदेशी तस्वीरें सोशल मीडिया पर न डाल देगा, इसलिए मैंने गुज्जर से संपर्क किया, जिन्होंने मुझसे कहा, ‘वह कलाकार बंदा है. स्कूल दा कुछ चंगा ही करेगा यानी वह स्कूल के लिए कुछ अच्छा करेगा.”

पंजाब के साथ कोई पारिवारिक संबंध न होने के बावजूद, 52 वर्षीय फोर्नीज़ ने छात्रों को सबसे अच्छा उपहार दिया है जिसकी उन्हें उम्मीद भी नहीं थी, उसने सभी चीजों को सही कराया कक्षाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं वाला एक स्कूल वापस जीवित किया. दीवार पर एक खूबसूरत संदेश भी लिखा “गोबिंदगढ़ जेजियन प्राइमरी स्कूल… दोस्तों के प्यार से बनाया गया… धन्यवाद”

प्रिसिंपल के मुताबिक स्कूल 1970 में बनाया गया था. कुमारी का कहना है कि हालांकि सभी प्रमुख नवीनीकरण 2020 तक पूरे हो गए थे, लेकिन कोविड के कारण स्कूल बंद था. कक्षाएं 2021 के अंत में शुरू हुईं, सभी नवीनीकरण पिछले साल समाप्त हो गए. उन्होंने कहा, स्कूल में वर्तमान में 155 छात्र हैं.

52 वर्षीय फोर्नीज़ ने मीडिया को बताया ” मैनें न केवल धन से योगदान दिया, बल्कि स्कूल की मदद के लिए एक ऑनलाइन फंड इक्कट्ठा करना भी शुरू किया. उन्होंने 38,000 डॉलर (लगभग 32 लाख रुपये) से अधिक जुटाए और यहां तक ​​कि अनुमति के लिए दर-दर भटकते रहे. वह आगे कहते हैं कि “मुझे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन गांव, दोस्तों और परिवार की मदद ने मुझे आगे बढ़ने में मदद की.” उनका कहना है कि जब उन्होंने पहली बार मदद की पेशकश के साथ राज्य शिक्षा विभाग से संपर्क किया तो उन्हें शायद ही कोई प्रतिक्रिया मिली. “वे एक विदेशी को अपने एक स्कूल के पुनर्निर्माण की कोशिश करते देखकर आश्चर्यचकित थे. उन्होंने वित्तीय सहायता और एक इंजीनियर से मदद का वादा किया था, लेकिन वह पैसा कभी नहीं आया और इंजीनियर केवल एक दिन के लिए आया.” जब स्कूल ठीक हो रहा था, तो छात्रों को कुछ महीनों के लिए पास के एक मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया था. हेड टीचर कुमारी ने भी बाउंड्री के निर्माण के लिए 50,000 रुपये का दान दिया.

हाल ही में उन्हें पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से उनके कामों के लिए सराहना भा मिली. बैंस ने बताया, “जब मैंने फ़ोर्नीस का वीडियो देखा कि उसने स्कूल को कैसे बदल दिया, तो मैंने उसे टेक्स्ट किया. हमने इस स्तर में सुधार के लिए पंजाब के स्कूलों में मिशन समर्थ की शुरुआत की है. हम 7,200 स्कूलों में चारदीवारी का निर्माण करा रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि 1,429 स्कूलों में पहली बार बाउंड्री का निर्माण किया जा रहा है… इसी तरह, 226 स्कूलों में अब तक शौचालय नहीं थे. मैं 19,190 स्कूलों को बदलने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर काम कर रहा हूं.”

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