
नई दिल्ली: कतर में मौत की सजा पाए भारतीय नौसेना के 8 पूर्व कर्मचारियों को वापस लाने के लिए भारत सरकार हर संभव कोशिश कर रही है और घर वापसी के प्रयासों पर सरकार का पूरा फोकस है. कतर में भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा मामले में भारत सरकार ने लेटेस्ट अपडेट दिया है और बताया है कि इस मामले में कहां तक प्रगति हुई है और सरकार अपनी ओर से क्या कर रही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा कि यह मामला अब अदालत में है और अब तक कतक की अदालत में तीन सुनवाई हो चुकी है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘इस बीच कतर की राजधानी दोहा में हमारे राजदूत को 3 दिसंबर को सभी आठ पूर्व नौसैनिकों से मिलने के लिए कॉन्सुलर एक्सेस मिला. इसके अलावा, इस स्तर पर आपसे साझा करने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं है. हमें इस बात के कोई संकेत नहीं मिले हैं कि किन लोगों को माफ किया गया था और उनमें कितने भारतीय वहां थे. साथ ही हमें निश्चित रूप से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि ये 8 लोग इसमें शामिल हैं.’
18 दिसंबर को अमीर ने किसे माफ किया?
बागची ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि कतर के अमीर ने 18 दिसंबर को देश के राष्ट्रीय दिवस पर भारतीय नागरिकों सहित कई कैदियों को माफ कर दिया, मगर भारतीय पक्ष के पास माफ किए गए लोगों की पहचान के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं है. बता दें कि कतर की अदालत ने निजी सुरक्षा कंपनी अल दहरा के साथ काम करने वाले आठ पूर्व भारतीय नौसैन्य कर्मियों को 26 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई थी. इस फैसले को भारत ने ‘बेहद हैरानी भरा’ बताया था और मामले में सभी कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही थी.
वापसी के प्रयासों पर फोकस
बागची ने कहा कि भारतीय पक्ष को उन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जिन्हें 18 दिसंबर को कतर के अमीर ने माफ कर दिया था. इतना ही नहीं, विदेश मंत्रालय ने बताया कि अभी भारतीय पक्ष को वह लिस्ट भी नहीं मिली है, जिसे कतर के शासक द्वारा माफ किया गया और यह भी नहीं पता है कि उसमें कितने भारतीय हैं. हालांकि, भारत सरकार ने कहा कि माफी पाने वालों में कुछ भारतीय हैं. बागची ने आगे कहा कि हमने कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर हम नज़र रख रहे हैं, और इस मामले को देख रहे हैं कि हम अपने लोगों को जल्द से जल्द भारत कैसे वापस ला सकते हैं.
पिछले साल अगस्त में हुए थे गिरफ्तार
इन आठ कर्मियों को कथित तौर पर जासूसी के एक मामले में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि न तो कतर के अधिकारियों ने, न ही नई दिल्ली ने उनके खिलाफ आरोपों को सार्वजनिक किया. कतर में इन आठों भारतीयों को किस आधार पर मौत की सजा दी गई है, इसका भी खुलासा नहीं हुआ है. हालांकि, केवल इतनी जानकारी है कि इन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप है.

कौन हैं ये भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर
आठों भारतीय निजी कंपनी दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीस एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम कर रहे थे. जो एक ओमानी नागरिक, रॉयल ओमानी वायु सेना के सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर के स्वामित्व वाली एक रक्षा सेवा प्रदाता कंपनी है. कतर में भारत के राजदूत ने इसी साल एक अक्टूबर को जेल में इन कर्मियों से मुलाकात की थी. इतना ही नहीं, इन आठ में से कुछ के परिवार ने भी कतर में मुलाकात की है. मौत की सजा पाने वालों में कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूरेनेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश शामिल हैं.
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FIRST PUBLISHED : December 22, 2023, 06:36 IST





