
नई दिल्ली: तमिलनाडु के बिजली मंत्री सेंथिल बालाजी के बाद अब तमिलनाडु के एक और मंत्री को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. मद्रास हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के. पोनमुडी को 3 साल की जेल की सजा सुनाई है. इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने मंत्री पोनमुडी और उनकी पत्नी पर 50-50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इससे पहले तमिलनाडु के ही सेंथिल बालाजी को 14 जून को ईडी ने ‘नौकरी के बदले नकदी’ घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जब वह पूर्ववर्ती अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) शासन के दौरान परिवहन मंत्री थे.
जानें कौन हैं के पोनमुडी?
हाईकोर्ट से झटका खाने वाले के. पोनमुडी तमिलनाडु में एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री हैं. मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी और उनकी पत्नी पी विशालाची को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया था और 2016 में निचली अदालत द्वारा पिछले बरी किए गए फैसले को पलट दिया. इसी केस में आज सजा का ऐलान हुआ है. तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के रहने वाले पोनमुडी ने पीएचडी कर रखी है और उन्होंने कुछ समय तक प्रोफेसर के रूप में भी काम किया है. बाद में वह द्रमुक की ओर आकर्षित हुए और वह 1989 में विल्लुपुरम से पहली बार विधायक बने. वह छह बार के विधायक हैं. 72 वर्षीय पोनमुडी फिलहाल कल्लाकुरिची जिले के तिरुक्कोयिलुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं और विल्लुपुरम-कल्लाकुरिची बेल्ट में काफी प्रभाव रखते हैं. उन्हें अल्पसंख्यक वोटों को द्रमुक की ओर लाने में भी प्रमुख व्यक्ति माना जाता है. अगर सुप्रीम कोर्ट भी उनकी सजा को बरकरार रखता है, तो ऐसे में पोनमुडी अपनी विधायकी और मंत्री पद खो देंगे.
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री और पत्नी को 3 साल जेल की सजा सुनाई, लगाया 50 लाख का जुर्माना
पोनमुडी पर क्या हैं आरोप
दरअसल, के पोनमुडी पर भ्रष्टाचार का आरोप है. पोनमुडी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की 13 (2)(धारा 13 (1) (ई) के साथ पढ़ी जाए) के तहत दंडनीय अपराध के संबंध में आरोप साबित हुए हैं. ऐसी धाराएं एक लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार और अवैध कमाई से संबंधित हैं. अदालत ने कहा कि विशालाक्षी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)की धारा 109 (उकसाने) के साथ पढ़ी जाने वाली भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की समान धाराओं के तहत आरोप साबित होते हैं. इसी साल जुलाई में पोनमुडी और उनके बेटे गौतम सिगामणि से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित अवैध रेत खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के 2011 के एक मामले में पोनमुडी और उनके बेटे से पूछताछ की थी. ईडी ने आरोप लगाया है कि पोनमुडी ने 2006 और 2011 के बीच खान और खनिज मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान तमिलनाडु लघु खनिज रियायत अधिनियम का उल्लंघन किया था. इसने पोनमुडी पर वनूर ब्लॉक के पूथुराई में लगभग 28.37 करोड़ रुपये की अवैध लाल रेत खदान आवंटित करने का भी आरोप लगाया है.

मद्रास हाईकोर्ट ने पुराना आदेश किया रद्द
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता के. पोनमुडी और उनकी पत्नी पी. विशालाक्षी को आय से ज्ञात स्रोत से 1.75 करोड़ रुपये की अधिक की संपत्ति के मामले में बरी करने के निचली अदालत के आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया. न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय द्वारा दायर याचिका पर आदेश पारित करते हुए मंत्री एवं उनकी पत्नी को दोषी ठहराया और उन्हें 21 दिसंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था. न्यायाधीश ने मामले में पोनमुडी और उनकी पत्नी को बरी करने के विल्लुपुरम के प्रधान जिला न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया.
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Tags: India news, Madras high court
FIRST PUBLISHED : December 21, 2023, 11:54 IST





