
रिंकल शर्मा का हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा पर अच्छी पकड़ है. वे तमाम पत्र-पत्रिकाओं में स्तंभ लिखती हैं, स्क्रिप्ट लिखती हैं. कविता-कहानी की कई पुस्तकें बाजार में आ चुकी हैं. बच्चों की प्रसिद्ध कॉमिक चाचा-चौधरी में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक सीरीज चला चुकी हैं. उर्दू के नामचीन लेखकों पर उनका संकलन ‘उर्दू के नौ महारथी’ काफी चर्चित रहा है. हाल ही में उनकी एक और कृति ‘भारत की 75 वीरांगनाएं’ प्रकाशित हुई है. प्रस्तुत हैं रिंकल शर्मा की दो लघु कथाएं-
अतिरिक्त कंबल
सेना के एक बड़े अफसर ने नए-नए रक्षामंत्री बने नेताजी को चिट्ठी लिखी जिसमें सिपाहियों के लिए एक की जगह दो कंबल उपलब्ध कराने की मांग की गई थी. नेताजी ने मांग पूरा करने से पहले सीमा पर खुद जाकर परिस्थितियों का जायजा लेने का निर्णय किया.
अगले दिन अपने चमचों और मीडिया के साथ सीमा पर पहुंचे नेताजी ने सैनिकों को खूब जोश भरा भाषण दिया. भाषण में सैनिकों को बहुत-सी सुविधाएं देने के बड़े-बड़े वादे किए गए और सैनिकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई गईं. तभी सेना के बड़े अफसर ने चिट्ठी की याद दिलाते हुए नेताजी से कहा-
“नेताजी, यहां की रातें बहुत ठंडी होती हैं. आपसे निवेदन है कि सैनिकों के लिए एक अतिरिक्त कंबल की व्यवस्था भी कर दी जाए.”
नेताजी- “हमारे देश के सैनिक वीर हैं. दुश्मन भी इनसे थर्राता है तो फिर सर्दी क्या चीज है. हमें नहीं लगता कि अतिरिक्त कम्बल की कोई आवश्यकता है.”
भाषण खत्म हुआ. सेना के कैंप में ही नेताजी के सोने के लिए चादर, तकिया और एक कम्बल की व्यवस्था की गई. रात का एक पहर बीता ही था कि नेताजी ठंड से कांपने लगे. नेताजी ने आदेश किया तो उनको एक और कंबल दिया गया. रात का दूसरा पहर बीत ही रहा था कि नेताजी ठंड से फिर कपकपाने लगे. बड़े अफसर ने इस बार अपना कम्बल नेताजी के लिए दे दिया. मगर बात फिर भी नहीं बनी. ठंडी हवा तीर-सी नेताजी के बदन को चीरने लगी. ठंड से नेताजी की घिग्घी बंधने लगी तो अफसर ने इस बार एक सैनिक का कम्बल भी नेताजी को दे दिया. चार कंबलों के बावजूद नेताजी पूरी रात ठंड से बेहाल हो सुबह का इंतजार करने लगे. सुबह होते ही नेताजी ने अतिरिक्त कम्बल की अर्जी पर मोहर लगाई और दिल्ली के लिए रवाना हो गए.
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अमीर मेजबान
चंडीगढ़ के एक होटल में दोपहर के समय मैं किसी का इंतजार कर रही थी. तभी सामने वाली टेबल पर कुछ लोग आकर बैठे. दो सरदार, उनके साथ दो औरतें और तीन बच्चे. उन लोगों के पहनावे को देखकर साफ समझ आ गया था कि महंगे कपड़े पहने हुए सरदार, उसकी पत्नी और एक छोटा लड़का, एक परिवार है. सामान्य से कपड़े पहने हुए दूसरे सरदारजी, उनकी पत्नी और उनकी दो बेटियां हैं. कुछ समय बीता उनकी बातचीत मेरे कानों में पड़ने लगी जिससे एक बात और साफ हो गई कि सामान्य-सा नजर आने वाला परिवार मेहमान है जोकि, चंडीगढ़ अपने इस अमीर रिश्तेदार के यहां मिलने आया है.
उन लोगों की बातचीत चल ही रही थी कि होटल का वेटर ऑर्डर लेने आ गया. मेजबान सरदारजी और उनकी पत्नी ने दो सब्जियों, एक दाल मखनी, चावल, नान, रायता इत्यादि का ऑर्डर दे दिया. कुछ देर बाद गरमागरम खाना उनकी टेबल पर परोसा जा चुका था. खाने के साथ-साथ उनकी बातचीत भी जारी थी.
मेजबान- “मैंने अभी मोहाली के पास बड़ी-सी जमीन खरीदी है. अगले हफ़्ते कैनेडा जाना है.”
मेजबान की पत्नी- (पति से) “सुनो, मेरी शॉपिंग लिस्ट का कोई समान छूटना नहीं चाहिए हां.”
मेजबान- “ओहो, ले आऊंगा मेरी मां.”
(इतना कहकर दोनों ठहाका मारकर हँसने लगे. मेहमान परिवार ने उनकी हँसी में साथ देना उचित समझा.)
मेजबान की पत्नी- “अरे सुनो, मेरा फेवरेट मूंग हलवा तो मंगवाओ. भाईसाहब, आप खा कर देखो, उंगलियां चाटते रह जाओगे.”
मेहमान परिवार उनकी हर बात पर हँस देता और उनकी हां में हां मिला देता. लेकिन उनकी सकुचाहट बता रही थी कि ये सब उनके लिए नया था. खाना खत्म करने के बाद मेजबान ने वेटर को बिल लाने को कह दिया. तभी मेजबान की पत्नी ने पति को कुछ इशारा किया. शायद उसे बाथरूम जाना था. मेजबान पत्नी के साथ बाथरूम की ओर चले गए. इधर होटल का बैरा बिल लेकर आ गया. मेहमान ने बिल देखा तो उनके चेहरे का रंग थोड़ा फीका पड़ गया. वेटर बिल रखकर चला गया.
मेहमान और उनकी पत्नी इधर-उधर नजरें घुमाकर मेजबान पति-पत्नी को ढूंढने लगे. कुछ देर बाद वेटर फिर आ कर खड़ा हो गया. इस बार दोनों पति-पत्नी ने मायूस नजरों से एकदूसरे को देखा. सरदारजी ने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले, कुछ पैसे उनकी पत्नी ने अपने पर्स से निकाले. दोनों के पैसे मिलाकर भी शायद बिल की रकम से कुछ कम थे. तभी उनकी करीब तेरह या चौदह साल की बेटी ने अपनी जेब से कुछ रुपए निकाले और अपने पिता को ये कहते हुए दे दिए कि बीजी ने चलते समय दिए थे. सरदार जी ने एक बार फिर रुपए गिने और वेटर को दे दिए. अब पूरा परिवार बिल्कुल चुपचाप बैठा था लेकिन उनके चेहरे की मायूसी बहुत कुछ कह रही थी. बहुत देर बाद मेजबान पति- पत्नी वापस आए और उन्होंने देखा कि बिल अदा किया जा चुका है तो हँसकर बोले “अरे बिल दे दिया आपने. इस बार तो ठीक है लेकिन अगली बार ऐसा नहीं चलेगा.” बेचारे मेहमान दंपत्ति इस बात पर भी उनकी हँसी में अपनी बेचारगी भरी मुस्कुराहट बिखेर गए.
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FIRST PUBLISHED : December 21, 2023, 12:19 IST





