टेलीकॉम बिल-2023 लोकसभा में पास, मोबाइल यूजर्स, सुरक्षा, OTT ऐप्स को लेकर क्या होंगे बदलाव? जानें

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नई दिल्ली. टेलीकॉम बिल, 2023 (Telecom Bill 2023) लोकसभा में पास हो गया है. इस टेलीकॉम बिल को एक बड़े सुधार के रूप में पेश किया गया है. यह टेलीफोन कंपनियों को स्पेक्ट्रम नीलामी के विपरीत, प्रशासनिक आधार पर स्पेक्ट्रम तक पहुंच प्रदान करके देश में उपग्रह-आधारित टेलीफोनी की शुरुआत के लिए एक उदार व्यवस्था की शुरुआत करने की कोशिश है. विधेयक में महत्वपूर्ण मोबाइल नेटवर्क को साइबर हमलों और दूसरी अवैध घुसपैठ से बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र बनाने का भी प्रावधान है. आम यूजर के लिए इस टेलीकॉम बिल 2023 की प्रमुख विशेषताएं इस तरह हैं.

व्हाट्सएप जैसे ओटीटी ऐप्स को विनियमित नहीं किया जाएगा
व्हाट्सएप, सिग्नल और टेलीग्राम जैसे ओटीटी प्लेयर टेलीकॉम के दायरे से बाहर हैं. इसका मतलब यह है कि टेलीकॉम बिल ओटीटी ऐप्स को विनियमित नहीं करता है.

19 सेवाओं/संस्थाओं को बिना नीलामी के स्पेक्ट्रम मिलेगा
टेलीकॉम बिल-2023 की “पहली अनुसूची” के तहत 19 सेवाओं को स्पेक्ट्रम प्रशासनिक रूप से दिया जा सकता है.
इसमे शामिल है:
1. राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक प्रसारण आदि.
2. जीएमपीसीएस धारकों (जैसे भारती वनवेब, स्टारलिंक, अमेजन कुइपर और रिलायंस जियो सैटेलाइट) सहित सैटेलाइट सेवाएं.
3. बीएसएनएल और एमटीएनएल.
जबकि अन्य के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा.

कुछ मैसेजों के लिए यूजर्स की पहले से मंजूरी जरूरी है
मैसेजों की तय कैटेगरी के लिए यूजर्स की पूर्व सहमति जरूरी है. इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा.

नया विवाद समाधान तंत्र कायम किया जाएगा
एक या अधिक ऑनलाइन विवाद समाधान तंत्रकायम किए जा सकते हैं. यूजर्स द्वारा मैलवेयर आदि की रिपोर्ट करने के लिए तंत्र जरूरी.

मंजूरी के बगैर टेलीकॉम ढांचा बनाने पर जुर्माना
विधेयक में मंजूरी के बगैर टेलीकॉम का बुनियादी ढांचा बनाना, गैरकानूनी तरीके से संदेशों को रोकना या टेलीकॉम नेटवर्क तक अनधिकृत घुसपैठ जैसे कामों के लिए दंड और सजा का प्रावधान है.

केवल केंद्र सरकार ही इंटरनेट बंद कर सकती है
इंटरनेट शटडाउन को केवल केंद्र सरकार द्वारा लागू किया जा सकता है.

शुल्क, ब्याज, अतिरिक्त शुल्क माफ करने की शक्ति हटाई गई
शुल्क, ब्याज, अतिरिक्त शुल्क, जुर्माना या अनुदान अपवादों को माफ करने की शक्ति हटा दी गई. इसका वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

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दिवालियेपन की कार्यवाही के दौरान कोई सेवा नहीं
दिवालियेपन से जुड़ी विशिष्ट शर्तें हटा दी गई हैं. एक टेलीकॉम सेवा देने वाली कंपनी दिवालियापन की कार्रवाई के दौरान सेवाएं देना जारी नहीं रख सकता है.

Tags: Mobile, Mobile apps, Mobile Phone, Ott, Telecom business

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