Book Review : अपने हर पल को बनाना चाहते हैं सरल और खुशहाल, तो पढ़ें ये किताब

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दुनिया भर की बेस्टसेलर किताबों में से एक इकिगाई (Ikigai) देखने में तो 106 पृष्ठों की किताब है, लेकिन इस छोटी-सी किताब में ज़िंदगी को समझने और समझ कर जीने के अनगित ज़िंदादिल उदाहरण और तरीके हैं. ये किताब आपके उद्देश्य या जुनून को पहचानने और उस ज्ञान का उपयोग करके अपने जीवन में बेमिसाल खुशी हासिल करने के बारे में है. ऐसा बिल्कुल ज़रूरी नहीं कि आपकी इकिगाई डकोई बड़ी महत्वाकांक्षा या जीवन का कोई अति महान उद्देश्य हो. आपका उद्देश्य सरल, सहज और सादगी भरा भी हो सकता है, जैसे कुकिंग करना, ज़रूरतमंद बच्चों को पढ़ाना, कुत्ते को इवनिंग वॉक पर ले जाना, बागबानी करना या फिर इसी तरह का कुछ भी.

टोक्यो, जापान में पली-बढ़ी ‘इकिगाई’ की लेखिका युकारी मित्सुहाशी इस बात को बेहतर समझती हैं, कि जापानी लोगों के लिए इकिगाई का क्या महत्तव है. मित्सुहाशी एक स्वतंत्र पत्रकार होने के साथ-साथ लेखिका भी हैं. उनका बचपन टोक्यो में बीता, वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई और फिर अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क चली गईं. 2004 में, कीयो यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने स्वतंत्र रूप से अनुवादक और लेखक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. उनका अधिकांश लेखन जापानी भाषा में है, लेकिन उनकी पुस्तकों का अनुवाद दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में हुआ है.

मित्सुहाशी की किताब ‘इकिगाई’ के अनुवादक राजेश अग्रवाल कुशल अनुवादक होने के साथ-साथ हिंदी लेखक भी हैं. दर्शन, विश्व-साहित्य और संगीत से विशेष लगाव रखने वाले राजेश गत दो दशक से साहित्य में साधनारत हैं. लॉस एंजेलिस में रहते हुए मित्सुहाशी ने इकिगाई की पारंपरिक अवधारणा को नए पाठकों से परिचित कराने के लिए इस किताब को लिखा है, जिसे हिंदी में अनुवाद करके राजेश अग्रवाल ने हिंदी पाठकों तक पहुंचाने का काम किया है.

‘इकिगाई’ हर परिस्थिति का एकमात्र समाधान नहीं है, बल्कि आपके अपने जीवन की हर छोटी बात पर ध्यान देने एवं रोज़मर्रा के क्षणों का महत्त्व समझने के लिए प्रोत्साहित करती है, क्योंकि इस किताब को पढ़ते हुए पाठक स्वयं की इकिगाई को पहचानना सीखता है. इस किताब में एथलीटों से लेकर लेखकों और व्यवसायियों तक अपनी इकिगाई को साझा करने वाले विभिन्न व्यक्तियों की केस स्टडीज़ शामिल हैं.

‘इकिगाई’ अपने आश्चर्यजनक रूप से सरल दर्शन और मुक्तिदायक अवधारणाओं के साथ एक बेहतरीन प्रस्तुति है, जो एक मार्गदर्शक का काम करती है. इस किताब की ख़ासियत है, कि इसे एक बार पढ़ने के बाद, हम अपने कई अनसुलझे सवालों के जवाब ढूढने के लिए इस बार बार पढ़ना चाहते हैं. और हर बार ये किताब किसी भी पुराने सवाल का जवाब नए तरीके से देती है.

अपनी किताब के बारे में बात करते हुए मित्सुहाशी लिखती हैं, “इकिगाई, एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सात वर्षों से अधिक समय तक कार्य करते हुए यह मेरे द्वारा अभी तक के खोजे गए विषयों में सबसे जटिल विषय रहा है. जब तक मुझे इस विषय पर लेख लिखने के लिए नियुक्त नहीं किया गया था, तब तक मैंने इस सिद्धांत का महत्त्व ही नहीं समझा था. यह जापान में प्रचलित बहुत ही आम धारणा है, जिसकी जापानी मानस पर इतनी गहरी छाप है, लेकिन मैंने कभी भी इसके सही महत्त्व को ध्यानपूर्वक खोजने की कोशिश नहीं की थी.”

गौरतलब है, कि इकिगाई दो जापानी अश्ररों कांजी ‘इकि’ और ‘गाई’ से मिलकर बना है, जिनमें इकि का अर्थ है जीवन और गाई का अर्थ है सार्थकता या महत्त्व. इस तरह इकिगाई का तात्पर्य जीवन के महत्त्व या जीवन में प्रसन्नता से है. आसान शब्दों में कहें तो यह वह कारण है, जिसकी वजह से आप सुबह उत्साह से जागते हैं. इकिगाई को समझने या समझाने के लिए आपके आसपास कोई शिक्षक मौजूद नहीं है, ऐसे में मित्सुहाशी की किताब ‘इकिगाई’ सार्थक साबित होती है.

ज़िंदगी आपके सामने तमाम तरह की समस्याएं लेकर आती है, ऐसे में ज़रूरी नहीं कि इकिगाई किसी भी तरह से एक जादुई फॉर्मूला साबित हो और समस्याओं को पूरी तरह खतम कर दे, लेकिन अपनी ज़िंदगी के हर फेज़ में इकिगाई के होने से ये उम्मीद ज़रूर की जा सकती है कि जब हम अपने जीवन को दुबारा समग्रता में देखेंगे तो संतुष्ट ज़रूर महसूस करेंगे.

पुस्तक : इकिगाई (नॉन-फिक्शन)
लेखक : युकारी मित्सुहाशी
अनुवादक : राजेश अग्रवाल
प्रकाशक : पेंगुइन स्वदेश
मूल्य : 199 रुपए

Tags: Book, Book revew, Hindi Literature, Hindi Writer, Literature, Motivational Story

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