
रोहतक. आजकल तकरीबन हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत है, लेकिन कई बार अनजाने में वह ऐसी गलतियां कर बैठता है कि वह गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाता है. लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा ऑर्गन होता है, अगर वह डैमेज हो जाता है तो ट्रांसप्लांट के सिवाय उसका कोई विकल्प नहीं होता और ट्रांसप्लांट भी बेहद मुश्किल काम है. एक तो गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भी वह संभव है, क्योंकि आमतौर पर लिवर का डोनर नहीं मिलता और अगर मिल भी जाता है तो 60 से 70 लाख रुपए लिवर ट्रांसप्लांट की लागत आती है, जोकि असंभव-सा इलाज है. कुल मिलाकर अगर लिवर डैमेज हो जाता है तो मरीज की मौत ही होती है और उसके लिवर को नहीं बचाया जा सकता. लेकिन अगर समय रहते लीवर की नियमित जांच करा ली जाए तो मरीज उसे डैमेज होने से खुद बचा सकता है. हालांकि, निजी अस्पतालों में तीन से पांच हजार रुपये में इसकी जांच होती है, लेकिन रोहतक पीजीआई में मुफ्त में फाइब्रोस्कैन से मरीज की जांच की जाती है और महज 5 मिनट के अंदर उसके लिवर की हेल्थ का अपडेट दिया जाता है, जिसके आधार पर मरीज अपनी लाइफ स्टाइल और खानपान में सुधार करके अपने लिवर को डैमेज होने से बचा सकता है.
हरियाणा के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान रोहतक पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि उनके विभाग में फाइब्रोस्कैन की मशीन से मरीजों के लिवर की जांच की जाती है और अब तक तकरीबन 32000 लोग इससे फायदा उठा चुके हैं, जिनमें हरियाणा के अलावा राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी मरीज आते हैं. अस्पताल में महज 5 रुपये की एक पर्ची बनवानी होती है. उसके बाद सब कुछ निशुल्क किया जाता है.

मरीज के लिवर की जांच फाइब्रोस्कैन मशीन से की जाती है, जिसमें किसी तरह का कोई सर्जिकल उपकरण इस्तेमाल नहीं होता. मरीज के पेट पर इंस्ट्रूमेंट लगाकर उसके लिवर की हेल्थ स्क्रीन पर आ जाती है और पता लगता है कि लिवर फिट है या फिर वह फैटी हो गया है या फिर डैमेज होना शुरू हो गया. अगर मरीज का लिवर खराब होना शुरू हो गया तो उसे खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करके ठीक भी किया जा सकता है, लेकिन एक बार अगर डैमेज हो गया तो वह दोबारा ठीक नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि 50 फ़ीसदी लिवर अत्यधिक शराब पीने से खराब होते हैं. मोटापा भी लिवर खराब होने का एक बड़ा कारण बनता है. इसके बाद काला पीलिया भी एक वजह है, जिसकी वजह से लिवर डैमेज होता है. अगर मरीज अपनी लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव कर ले तो लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है.
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि उनके विभाग में फाइब्रोस्कैन की मशीन से मरीजों के लिवर की जांच की जाती है.
महिलाओं में लिवर की जांच को लेकर हिचकिचाहट है, लेकिन यहां पर उनके लिए भी फीमेल स्टाफ तैनात किया गया है. अगर कोई महिला अपने लिवर की जांच कराने के लिए आती है तो फीमेल स्टाफ ही वह जांच करेगा और पुरुष मरीजों के लिए पुरुष स्टाफ तैनात किया गया है. संस्थान की नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि यहां पर फाइब्रोस्कैन मशीन को ऑपरेट करने के लिए बाकायदा स्टॉफ को ट्रेनिंग दी गई है और उसी के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार की जाती है. मरीज के लिवर की हेल्थ कैसी है, अगर समय रहते थोड़े से जागरूक हो जाएं तो लिवर को डैमेज होने से बचाया जा सकता है.
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Tags: Haryana News Today, Liver transplant, Rohtak News
FIRST PUBLISHED : December 13, 2023, 14:18 IST





