कैसे होती है संसद की सुरक्षा? चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर का दावा तो फिर कैसे हो गई इतनी बड़ी चूक?

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

हाइलाइट्स

संसद की सुरक्षा कई लेयर में होती है.
2 हजार से भी ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से चप्पे चप्पे पर रहती है नजर.
हजारों की संख्या में सशस्‍त्र जवान रहते हैं तैनात.

नई दिल्ली. देश की सबसे सुरक्षित इमारत मानी जाने वाला संसद भवन एक बार फिर बुधवार को चर्चा में आ गया. दरअसल संसद भवन के अंदर करीब 1 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही चल रही थी उस दौरान दो लोग सदन के अंदर दर्शक दीर्घा से कूद गए. एक युवक ने अपना जूता खोल लिया तो दूसरे ने धुंएं का पटाखा चला कर सनसनी फैला दी. आज ही के दिन 22 साल पहले हुए संसद भवन के हमले को याद करते हुए इसको भी उसी हमले से जोड़ा गया और सभी की सांस अटक कर रह गई. हालांकि ये उग्र प्रदर्शन से ज्यादा और कुछ नहीं निकला लेकिन यहां पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि आखिर संसद की सुरक्षा किस तरीके से होती है और इतनी बड़ी चूक आखिर हो कैसे गई.

दरअसल संसद की सुरक्षा पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस करती है. इसमें सीआरपीएफ, दिल्ली पुलिस और संसद की अपनी सुरक्षा टीम होती है. संसद भवन की सुरक्षा का जिम्मा जॉइंट सेक्रेटरी (सिक्योरिटी) के पास होता है. इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा के अपने अपने सुरक्षा घेरे होते हैं. ये लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय संचालित करते हैं.

ये भी पढ़ेंः संसद की सुरक्षा में चूक पर बोले पूर्व DGP ओपी सिंह, जल्‍द पूरी हो दोषी अफसरों के खिलाफ जांच, नौकरी से करें बर्खास्त

अपना एक अलग सिस्टम, हजारों कैमरे
संसद भवन का इसी के साथ अपना एक अलग इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम भी होता है. इसका एक बड़ा कंट्रोल रूम होता है और हजारों सीसीटीवी कैमरों से संसद के कोने कोने के रिले को इसी कंट्रोल रूम में लोग मॉनिटर करते हैं. इसी कंट्रोल रूम से लोग लाइव फीड देखकर सुरक्षा कर्मियों को सूचनाएं भी दी जाती हैं. आम भाषा में कहें तो ये संसद के आंख और कान का काम करता है.

कई लेयर में सिक्योरिटी
संसद के अंदर और बाहर की सिक्योरिटी कई लेयर में की जाती है. इसकी सिक्योरिटी के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी मौजूद रहते हैं. संसद के अंदर घुसने से पहले ही स्कैनर मशनों और बारिकेड्स से होकर गुजरना होता है. ये यहीं खत्म नहीं होता, संसद में सांसदों के अलावा किसी भी अन्य को प्रवेश करने के लिए खास एंट्री कार्ड मिलता है. इस कार्ड को स्कैन करने के बाद ही बाहरी गेट से प्रवेश किया जा सकता है.

इसके बाद भवन तक पहुंचने के दौरान भी दो बार सुरक्षा जांच से गुजरना होता है, इस दौरान भी पूरी तरह से व्यक्ति का स्कैन कर लिया जाता है और किसी भी तरह का हथियार, नुकीली वस्तु, पान, बीड़ी, सिगरेट या माचिस जैसा कोई भी सामान वहीं जमा हो जाता है.

इसके बाद आती है सबसे मुख्य लेयर. ये वो लेयर होती है जहां पर भवन के अंदर की सुरक्षा की जाती है. यहां पर 2000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की अलग-अगल भागों में तैनाती रहती है. हालांकि ये तैनाती लोकसभा और राज्यसभा भवनों के बाहर तक ही होती है. भवन के अंदर की सुरक्षा पूरी तरह से पार्लियामेंट सिक्योरिटी के पास होती है और यहां पर मार्शल तैनात रहते हैं. जो किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए तैयार रहते हैं.

कैसे होता है पास जारी
संसद में किसी भी कर्मचारी, सांसद, सुरक्षाकर्मी और विजिटर का पास बनाने की पूरी जिम्मेदारी पार्लियामेंट्री सिक्योरिटी सर्विस की ही होती है. किसी भी व्यक्ति या वाहन के प्रवेश के लिए पार्लियामेंट्री सिक्योरिटी सर्विस ही पास जारी करती है. ये सर्विस ये भी सुनिश्चित करती है कि जिस संसद परिसर में आने की अनुमति दी गई है, क्या वो इसका पात्र है या नहीं.

ये करते हैं असली सुरक्षा
संसद पर 22 साल पहले हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा के लिए एक ऐसे ग्रुप का भी गठन किया गया था जो आधुनिक हथियारों से लैस कमांडो फोर्स थी. इसको पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप का नाम दिया गया था. इस ग्रुप के पास आधुनिक हथियार होते हैं और ये संसद के चप्पे चप्पे पर फैले हुए रहते हैं. इस ग्रुप के सुरक्षाकर्मियों को सीआरपीएफ से लिया जाता है और ये केवल 4 साल के लिए ही इस सर्विस में आते हैं और बाद में सीआरपीएफ में वापस लौट जाते हैं. ये सभी स्पेशल कमांडोज होते हैं.

हर सेंकेंड का अपडेट
संसद की पूरी इमारत की बाहर और अंदर से हो रही सुरक्षा का अपडेट औसतन हर 1.2 सेंकेंड में भेजा जाता है. किसी भी तरह की संदिग्‍ध हरकत पर अलार्म बज जाते हैं और सुरक्षा घेरे को कस दिया जाता है. संसद के अंदर तो दूर लेकिन कोई बाहर से भी किसी तरह अंदर प्रवेश करने की कोशिश करे तो अलार्म बज जाते हैं.

तो फिर कैसे हो गई इतनी बड़ी चूक!
लोकसभा सदन में दो लोगों का घुसना बड़ी चूक के तौर पर सामने आ रहा है. हालांकि ये चूक कैसे हुई इसको अभी समझना काफी मुश्किल है लेकिन धुंएं के पटाखे अंदर लेकर जाना इसलिए भी संभव हो सकता है क्योंकि उसमें किसी भी तरह का मैटल नहीं होने के चलते ये स्कैनर से शायद बच गया हो. लेकिन ये सुरक्षाकर्मियों की ओर से की जाने वाली चेकिंग से कैसे बचा ये सवालिया घेरे में है.

Tags: Attack, CRPF, Indian Parliament, Parliament house, Parliament news

Source link

Leave a Comment