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दरअसल, ये कार्य आश्रम का खर्च चलाने के लिए शुरू किया गया था. स्वामी सत्यानंद सरस्वती योग आश्रम के महाराज स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती बताते हैं कि आश्रम चलाने के लिए पैसों की जरूरत थी, क्योंकि यहां शिष्य, सेवक, सेविका, गाय और सांड हैं.

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