
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों और रक्षा कर्मियों के जरिए अपनी योजनाओं को लोकप्रिय बनाने में कुछ भी गलत नहीं लगता है. कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न रक्षा संस्थानों और सैनिक स्कूलों में सेल्फी प्वाइंट स्थापित करने के रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर भी प्रथम दृष्टया अनुकूल रुख अपनाया.
हाईकोर्ट ने पूछा कि जब उत्तराखंड में मजदूर सुरंग में फंसे थे, तो भारतीय सेना और एनडीआरएफ ने अभूतपूर्व काम किया. अगर सेना इसे सेल्फी प्वाइंट के साथ लोकप्रिय बनाना चाहती है, तो मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई शिकायत हो सकती है. मान लीजिए कि मैं पेंशन लाभ पर एक सेल्फी प्वाइंट देखता हूं, तो मेरी प्रतिक्रिया होगी लाभ क्या है? क्या इस पहलू पर ‘बहस या पूछताछ’ नहीं होगी?
कोर्ट ने ऐसे सेल्फी प्वाइंटस पर प्रधानमंत्री की फोटोा के इस्तेमाल के मुद्दे पर कोर्ट ने टिप्पणी कि क्या यह आदर्श नहीं है? प्रत्येक मुख्यमंत्री (विज्ञापनों में) तस्वीरें लगा रहा है? कोर्ट ने यह टिप्पणी सरकारी योजनाओं और नीतियों के प्रचार के लिए सरकारी कर्मचारियों और रक्षाकर्मियों के मदद लेने को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी.
याचिका में सरकार द्वारा जारी दो आदेशों को रद्द करने की मांग की गई. एक रक्षा मंत्रालय द्वारा, जिसमें सेना, नौसेना और वायु सेना को रक्षा मंत्रालय की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो के साथ सेल्फी प्वाइंट बनाने का निर्देश दिया गया था. दूसरा आदेश कार्मिक विभाग द्वारा जारी किया गया था. भारत सरकार के पिछले 9 वर्षों की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए संयुक्त सचिवों/निदेशकों/उप सचिवों को जिला रथप्रभारी के रूप में तैनात करने के लिए प्रशिक्षण देने का आदेश दिया गया था.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने अब 4 जनवरी 2024 को मामले की सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सबसे पहले सवाल किया कि एक कल्याणकारी योजना को लोकप्रिय क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई कल्याणकारी योजना है, तो क्या उस योजना को लोकप्रिय नहीं बनाया जाना चाहिए? विज्ञापनों में हमेशा मुख्यमंत्रियों या प्रधानमंत्री की तस्वीरें होती हैं.
केवल पिछले नौ वर्षों की योजनाओं पर प्रकाश डालने पर कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति सरकार की नई योजनाओं से अवगत होना चाहता है. ऐसा नहीं है कि कोई यह जानना चाहता है कि 50 साल पहले क्या हुआ था? इसके लिए प्रधानमंत्री का संग्रहालय है.
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FIRST PUBLISHED : December 4, 2023, 13:31 IST





