बुरी हार के बीच कांग्रेस को मिले दो सितारे, 2024 में दिखाएंगे रोशनी!

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चार राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में से तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की बुरी हार हुई है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ राजस्थान में पार्टी की सभी रणनीतियां औंधे मुंह गिर गई हैं. उसकी इज्जत केवल एक राज्य ने बचाई, वो है तेलंगाना. हालांकि, इस राज्य से पार्टी ने सबसे कम उम्मीद की थी. कुछ माह पहले तक कोई भी राजनीतिक पंडित यह कहने की स्थिति में नहीं था कि तेलंगाना में कांग्रेस इतना शानदार प्रदर्शन कर सकती है. खैर, हम चुनावी नतीजों पर बात नहीं कर रहे हैं. कांग्रेस के लिए निराशा से भरे इस रिजल्ट में एक उम्मीद की किरण दिख रही है.

ये उम्मीद हैं रेवंत रेड्डी और सुनील कानुगोलू. ये दो ऐसे सितारे हैं जिसने साबित किया है कि सही रणनीति और सड़कर पर फाइट करने वाले नेता हों तो चुनाव में जीत हासिल की जा सकती है. तेलंगाना में कांग्रेस ने इसी रणनीति पर काम किया. इस चुनाव से कांग्रेस को सुनील कानुगोलू जैसे रणनीतिकार और रेवंत रेड्डी जैसे फाइटर नेता मिले हैं. तेलंगाना कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रेवंत रेड्डी एक फाइटर नेता हैं. वह मात्र पांच साल पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे. उनका जन्म 8 नवंबर 1967 को हुआ था. वह अभी 56 साल के हैं. कांग्रेस से पहले वह भाजपा की छात्र ईकाई एवीपी और टीडीपी में रह चुके हैं. वह टीडीपी की ओर से दो बार विधायक रहे हैं. 2017 में वह टीडीपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी ने 2021 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया.

वह 2018 का विधानसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन 2019 में उन्होंने शानदार वापसी की और मलकाजगिरी से सांसद चुने गए. वह उस वक्त सांसद बने जब कांग्रेस पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी. रेवंत रेड्डी छात्र राजनीति के वक्त भाजपा की छात्र ईकाई एवीपी के सदस्य थे. मौजूदा तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के पीछे रेवंत रेड्डी की कड़ी मेहनत और सुनील कानुगोलू की रणनीति को अहम बताया जा रहा है. रेवंत रेड्डी पार्टी को एकजुट रखने, गुटबाजी को कंट्रोल करने और प्रचार अभियान में जान झोंकने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं.

राहुल गांधी के सबसे करीबी!
दूसरी तरफ सुनील कानुगोलू हैं. मौजूदा वक्त में कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी के सबसे करीब अगर कोई व्यक्ति है तो उसका नाम सुनील कानुगोलू है. कभी प्रशांत किशोर के साथ चुनावी रणनीति बनाने का काम करने वाले सुनील इस वक्त कांग्रेस पार्टी के साथ हैं. वह तेलंगाना से पहले कर्नाटक में प्रदेशाध्यक्ष डीके शिवकुमार के साथ चुनावी रणनीति बनाने पर काम किया और वहां भी पार्टी को जीत दिलाई थी. चुनावी पंडितों का कहना है कि सुनील की रणनीति पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में ध्यान नहीं दिया गया क्योंकि यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनसे सहमत नहीं थे. यह जरूर है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की बुरी हार ने चुनावी पंडितों को भी अचंभित कर दिया है.

कर्नाटक के बाद तेलंगाना में जीत हासिल कर कांग्रेस पार्टी ने दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत की है. लेकिन, राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो उत्तर भारत में पार्टी का बुरी तरह सफाया हो गया है. उत्तर भारत में अब उसके पास केवल हिमाचल प्रदेश बचा है, जहां उसकी सरकार है. सुनील कानुगोलू ने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए और उससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के लिए काम किया था. इसके अलावा वह तमिलनाडु में एमके स्टालिन के लिए भी काम कर चुके हैं.

उनके व्यक्तित्व के बारे में कहा जाता है कि वह मीडिया और चकाचौंध से दूर रहते हैं. वह चुपचाप अपना काम करते हैं. तेलंगाना में उन्होंने केसीआर को पटखनी देने के लिए दिनरात एक कर दिया था.

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