पुस्तकायन 2023: साहित्य अकादमी के पुस्तक मेला में शायरों ने जमाया रंग

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नई दिल्ली के रवींद्र भवन में आयोजित साहित्य अकादमी का पुस्तक मेला ‘पुस्तकायन’ समय के साथ परवान चढ़ रहा है. पुस्तक मेला का तीसरा दिन मुशायरे के नाम रहा. मुशायरे के अलावा अलग-अलग सत्रों में साहित्यकार और कलाकारों ने विभिन्न विधाओं पर चर्चा और कार्यक्रम प्रस्तुत किए.

मशहूर शायर चंद्रभान ख़्याल की अध्यक्षता में आयोजित मुशायरे में खालिद महमूद, आजिम कोहली, फारूक अर्गली, मोइन शादाब और तहसीन मुनव्वर ने अपने कलाम प्रस्तुत किए. मुशायरे का संचालन मोइन शादाब ने किया.

मोइन शादाब के शेर, “देख कर फ़स्ल अंधेरों की हैरत कैसी, तूने खेतों में उजाला कहां बोया था” को खूब सराहा गया. तहसीन मुनव्वर ने कई ग़ज़लें प्रस्तुत कीं. उनकी ग़ज़ल “तुझे प्यार से अपना बनाके मारेंगे, नए यज़ीद हैं पानी पिला के मारेंगे” को श्रोताओं ने बहुत पसंद किया. अजीम कोहली का शेर “वो जिसके हुक्म से सब हो रहा है/वही तेरा, वही मेरा ख़ुदा है” को भी दाद मिली. खालिद महमूद का शेर था- “हुनरमंदी से जीने का हुनर अब तक नहीं आया/ सफर करते रहे, तर्जे सफर अब तक नहीं आया”. अंत में, फारूक अर्गली ने अपने दोहे- “हिंदी भाषा मदभरी, उर्दू रस की खान। एक हमारा गौरव है, एक हमारी शान” से पूरे माहौल का रस परिवर्तन करने का किया. मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे चंद्रभान खयाल ने अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत कीं. उनका एक शेर खूब सराहा गया- “मेरे आगे न था रास्ता कोई भी/मेरे पीछे मगर लोग सारे चले” को खूब तालियां मिलीं. साहित्य अकादमी के संपादक अनुपम तिवारी ने सभी शायरों का परिचय दिया और उनका स्वागत किया.

मुशायरे से इतर सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मनस्वी गर्ग ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी. पुस्तक मेला में बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्टूनिस्ट माधव जोशी के साथ बच्चों के लिए कार्टून कार्यशाला का भी आयोजन किया गया.

Tags: Books, Hindi Literature, Literature

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