
कर्नाटक चुनावों ने बीजेपी को जबरदस्त झटका दिया था. उस झटके के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ पर नजर डाली तो मानो डबल झटका लग गया हो. कर्नाटक के झटके से उबरते हुआ बीजेपी आलाकमान ने तय कर लिया था कि अब इन तीनों राज्यों मे कार्यकर्ता भी घर से निकालने होंगे और जीत का नरेटिव भी सेट करना होगा. पीएम नरेन्द्र मोदी ने तीनों राज्यों मे संगठन को दुरुस्त करने और प्रचार को पटरी पर लाने का काम गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दिया. अमित शाह ने शुरुआत की मध्यप्रदेश से. राज्य के मालवा इलाके में इंदौर से उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन शुरु किया. ये मालवा इलाका बीजेपी का गढ़ माना जाता है जिसने पिछले चुनावों मे कांग्रेस को ज्यादा सीटें दे दी थीं. ये संदेश था पार्टी को कि अपने गढ़ को मजबूत रखना है.
वो दौर गया जब बीजेपी कहा करती थी मोदी है तो मुमकिन है. अब मोदी सरकार की तमाम योजनाएं सफलता पूर्व जमीन पर उतर रही हैं. गरीब जनता को उनका लाभ मिल रहा है. 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, हर घर नल, एस्पीरेशनल जिलों के विकास का कार्यक्रम, आवास योजनाओं को सफल क्रियान्वयन ने जनता का भरोसा पीएम मोदी पर जगा दिया है. तभी तो पीएम मोदी ने मध्यप्रदेश की अपनी एक रैली में जनता को कहा कि मोदी गारंटी है जो गारंटी को पूरा करने की गारंटी लेता है. यही बात उन्होंने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कही जिसका जनता ने पुरजोर समर्थन किया. मोदी गारंटी मतलब ये कि वे सिर्फ योजनाएं शुरु नहीं करते बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से अमली जामा भी पहना देते हैं. आम जनता का यही भरोसा है कि तीनों राज्यों में बीजेपी ने किसी चेहरे पर नहीं बल्कि पीएम मोदी और मोदी गारंटी पर दांव लगाया और उन्हे भरपूर और कमाल की सफलता मिली.
हिंदी बेल्ट में बीजेपी का संगठन अभेद्य
26-27 जून को ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ कार्यक्रम में पीएम मोदी की हिस्सेदारी रही जिसमें देश भर से आए विस्तारकों ने हर बूथ पर जाकर अपनी मजबूती दिखायी. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रभारी बदले गए. मध्यप्रदेश में केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और अश्विनी वैष्णव को चुनावी प्रभारी बना कर भेजा गया. छत्तीसगढ़ में पुराने संगठनकर्ता ओम भाई माथुर और पटना से विधायक नीतिन नविन को काम पर लगाया गया. ये चेहरे टीवी और मीडिया पर नजर तो नहीं आए लेकिन कि वही जो आलाकमान चाहता था. कार्यकर्ताओं को घर से बाहर लाना, उन्हें ये भरोसा दिलाना की बीजेपी जीत रही है और साथ ही बूथ स्तर तक सम्मेलन करना ताकि कार्यकर्ता चुनावों के लिए तैयार रहे. इसलिए जब आलाकमान जब पूरी तरह प्रचार में कूदने को तैयार था संगठन भी उस प्रचार को जनता तक ले जाने को लिए तैयार था.
राजस्थान में आधी दर्जन यात्राएं निकालीं
उधर, राजस्थान में भी पार्टी परेशान थी नेताओं की अंदरुनी कलह से. आधा दर्जन मंत्री और नेता ऐसे थे जो खुद को सीएम उम्मीदवार मान के लिए आगे बढ़ रहे थे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनहित में ऐसे कदम उठाए की उनका ग्राफ गिरने के बजाए उठना शुरु हो गया. ऐसे में आलाकमान ने तय की राज्य में आधी दर्जन यात्राएं निकालीं जाएंगी. इसमें सभी नेताओं को शामिल होने का निर्देश दिया गया. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे जो खुद को प्रोजेक्ट नहीं किए जाने के कारण बाहर नहीं निकल रहीं थी, उन्हें भी बाहर आना पड़ा. आला कमान के दबाव मे स्थानीय नेताओं को एकता का संदेश देना पड़ा. यही संदेश कार्यकर्ताओं में जाना शुरु हो गया. गृहमंत्री अमित शाह बार बार यही कह रहे थे कि सिर्फ कानून व्यवस्था ही ऐसा मुद्दा है जो बीजेपी की नैय्या पार लगा देगा. इसलिए पार्टी जब पूरी तरह चुनाव प्रचार मे कूदी तो साफ हो गया कि कार्यकर्ता जोश के साथ जंग में कूदने को तैयार है. अब हम उन परतों को सिलसिलेवार खोलने की कोशिश करेंगे जो जीत का कारण बने.
टिकट को लेकर बीजेपी के प्रयोग सफल रहे
चुनावों के तीन महीने पहले ऐसा प्रतीत हो रहा था कि तीनों राज्यों में बीजेपी हार की कगार पर है. लेकिन हुआ ठीक पलट. बीजेपी ने पहले मध्यप्रदेश में तीन केन्द्रीय मत्रियों को और चार सांसदों को विधानसभा चुनावों में टिकट दे दिया. अमित शाह ने भी ऐलान कर दिया कि सीएम पार्टी का संसदीय बोर्ड तय करेगा. ऐसे में आलाकमान एक तीर से कई शिकार कर रहा था. सबसे पहले इन नेताओं को हारी हुई सीटों पर मैदान में उतारने से न सिर्फ उस सीट पर जीतने की संभावना बनी, बल्कि आस पास की सीटों पर भी जीत की संभावना बढ़ गयी. राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी प्रयोग हुआ जो खासा सफल रहा. छत्तीसगढ़ में 55 नए चेहरों पर दांव खेलने का प्रयोग भी बीजेपी को वहां अप्रत्याशित जीत दिला गया. यानि चेहरा तीनों राज्यों मे नहीं फिर भी मोदी गारंटी से मिली जीत.
इंडी गठबंधन और जातीय गणना का दांव प्लॉप साबित हुआ
मध्यप्रदेश में जब समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से सीटें मांगी तो कमलनाथ ने कहा कि अरे छोड़ो अखिलेश को. अखिलेश इतने नाराज हुए और कांग्रेस आलाकमान को भी शिकायत कर डाली. गठबंधन यहीं बिखर गया. राहुल गांधी और नीतिश कुमार बार-बार जातीय जनगणना की वकालत करते रहे लेकिन लगता है जनता ने थोड़ा भी ध्यान नहीं दिया. कांग्रेस की करारी हार तो यही कहानी कह रही है कि अब देश में ओबीसी का सबसे बड़ा नेता नरेन्द्र मोदी ही है जिस पर जनता भरोसा जता रही है. कांग्रेस अपनी अंदरुनी कलह तो मिटा नहीं पायी लेकिन प्रचार के दौरान भी एक दूसरे की जड़ें खोदने का काम करते रहे. बिखरे घर का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा क्योंकि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में तो वे जीत के आश्वस्त ही थे.
आदिवासी समाज पर पीएम मोदी का विशेष फोकस
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चुनाव और आदिवासी समाज के तमाम नेताओं को सम्मान देने की जो शुरुआत पीएम मोदी ने की थी, उसका नतीजा अब मिलने लगा है. 14 नवंबर को बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर आदिवासी जनजातिय दिवस मनाना, आदिवासी संग्रहालय बनाना, आदिवासियों के कल्याण के लिए योजनाओं का सफल क्रियान्वयन, एस्पीरेशनल जिलों में विकास के काम को मिशन मोड में पूरा करना जैसे प्रयासों ने पीएम मोदी की मोदी गारंटी को आदिवासी इलाकों तक पहुंचा दिया. पीएम मोदी जानते हैं कि मध्यप्रदेश में 47 आदिवासी सीटे हैं, तो छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी आदिवासी कई इलाकों में प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए तीनों राज्यों में आदिवासी सीटों पर कांग्रेस को छोड़कर एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताया.
पीएम मोदी की साइलेंट वोटर अब खामोश नहीं रहतीं
मध्यप्रदेश में सीएम की लाडली योजना, राजस्थान में हिंसा की शिकार महिलाएं और बिगड़ती कानून व्यवस्था और छत्तीसगढ़ में गृहणियों को कैश देने का बीजेपी का वायदा कारगर रहा. लेकिन इन सबसे से ऊपर पीएम मोदी पर इन महिला वोटरों का भरोसा एक अलग ही संदेश दे गया. गरीब महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. महिला, युवा, आदिवासी, वंचित समाज पर आने वाले दिनों में मोदी सरकार का विशेष ध्यान रहेगा. चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी जब बीजेपी मुख्यालय पहुंचे तो वहां मंच पर लगे बोर्ड पर लिखा था सपने नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो सब मोदी को चुनते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले लोकसभा चुनावों तक यही मोमेंटम बना कर रखना है. यही मोदी गारंटी है जिस पर बीजेपी को भरोसा है कि अगले चुनाव में भी बहुमत दिलाएगा.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
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Tags: BJP, Chhattisagrh news, MP Assembly Elections, Rajasthan Assembly Elections
FIRST PUBLISHED : December 3, 2023, 21:19 IST





