
हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार संजीव समेत 24 लेखकों को इस साल साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है. सोशल मीडिया पर संजीव को अकादमी पुरस्कार मिलने की बधाइयां दी जा रही हैं. कहा जा रहा है कि साहित्य अकादमी ने उन्हें देर से पहचाना. लेकिन ‘देर आये दुरुस्त आये’ कहा जा रहा है. वाकई संजीव को यह पुरस्कार मिलना चाहिए थे. 76 वर्षीय संजीव नौ उपन्यास लिख चुके हैं. 1980 में सारिका में कहानी प्रतियोगिता में प्रथम आकर ‘अपराध’ कहानी से साहित्य के आकाश पर चमकने वाले संजीव को 43 साल बाद यह पुरस्कार मिला.
साहित्य अकादमी पुररस्कारों की बधाइयों के बीच यह सवाल किसी नहीं उठाया कि किसी दलित, आदिवासी या मुस्लिम लेखक को हिंदी में अकादमी पुरस्कार क्यों नहीं मिलता. यह सवाल लेखिकाओं के लिए भी पहले उठता था पर एक दशक में अकादमी ने मृदुला गर्ग, चित्रा मुद्गल, नासिरा शर्मा और अनामिका को यह अवॉर्ड देकर अपने माथे पर लगा कलंक का टीका धो लिया. लेकिन दलितों और मुस्लिम लेखकों के साथ कब न्याय होगा, यह सवाल अभी भी बरकरार है. ओम प्रकाश वाल्मीकि, तुलसी राम, मोहनदास नैमिशराय, श्योराज सिंह बेचैन, धर्मवीर सहित ऐसे तमाम लेखक रहे हैं जिनको यह साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिल सकता था. इसी तरह शानी, बदीउज़्ज़मां, असगर वज़ाहत, अब्दुल बिस्मिल्लाह और असद ज़ैदी जैसे मुस्लिम लेखकों को यह अवॉर्ड मिलना चाहिए था.
बद्दीउज़्ज़मां के पत्रकार पुत्र शजी जम्मां ने अकबर पर एक विशाल उपन्यास लिखा लेकिन हिंदी जगत ने नोटिस नहीं लिया. हालांकि, साहित्य अकादमी पुरस्कार जाति, धर्म और लिंग के आधार पर नहीं मिलता. पर सवाल यह है कि हमारा साहित्य समावेशी कब होगा. आजादी के 70 साल बाद भी इन लेखकों को उनका हक क्यों नहीं मिल रहा, क्या साहित्य अकदमी स्वर्ण मानसिकता से परिचालित है?
आखिर निर्णायक उन लेखकों के बारे में क्यों नहीं सोचते. अकादमी कहती है कि पिछले तीन साल में जो पुस्तकें शॉर्ट लिस्ट हुईं उनमें यह पुरस्कार दिया गया पर अकदमी पुरस्कार की घोषणा से पहले शॉर्टलिस्टेड किताब की घोषणा क्यों नहीं करती. जबकि बुकर पुरस्कार के लिए शॉर् टलिस्टेड किताबों की घोषणा पहले की जाती है.
असगर वज़ाहत को संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार के लिए चुना गया लेकिन साहित्य अकादमी आज तक नहीं दिया गया. जबकि, दया प्रकाश सिन्हा को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने के बाद साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया. तब हिंदी के मुस्लिम लेखक क्यों वंचित रहें साहित्य अकादमी से. यह सवाल साहित्य की दुनिया में अक्सर उठता रहता है.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
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FIRST PUBLISHED : December 20, 2023, 18:29 IST





