
MLALAD Scheme: दिल्ली के हर विधायक को अब अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए सालाना 7 करोड़ रुपये मिलेंगे. दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार (AAP) ने विधायकों को मिलने वाली MLALAD (विधायक विकास निधि) की राशि बढ़ा दी है. दिल्ली के प्रत्येक विधायक को अभी तक अपने क्षेत्र के विकास के लिए हर साल 4 करोड़ रुपए की राशि मिला करती थी.
क्या सीधे मिलता है ये पैसा?
MLAs को विधायक निधि की राशि सीधे नहीं मिलती है, बल्कि यह ठीक सांसद सांसद विकास निधि (MPLAD) की तरह है. प्रत्येक विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए विकास कार्य प्रस्तावित करते हैं और इस विकास कार्य के बदले धनराशि आवंटित की जाती है. विधायक- सड़क निर्माण, रिपेयरिंग से लेकर कम्युनिटी सेंटर जैसी चीजों के मद में राशि मांग सकते हैं.
दिल्ली में विधायक निधि की राशि बढ़ने के साथ ही अब यह ऐसा सूबा बन गया है, जहां विधायकों को सर्वाधिक धनराशि मिलती है. देश के दूसरे राज्यों पर नजर डालें तो त्रिपुरा ऐसा राज्य है जहां विधायकों को विकास कार्य के लिए सबसे कम, सिर्फ 35 लाख रुपए की राशि मिलती है.
किस राज्य में विधायकों को कितना पैसा?
अभी तक उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) ऐसा राज्य था, जहां विधायकों को सर्वाधिक 5 करोड़ रुपये सालाना की राशि मिला करती थी. अब दिल्ली आगे निकल गया है. राज्यवार आंकड़ा देखें तो उत्तर प्रदेश के 403 विधायकों के लिए MLALAD के मद में 2015 करोड़ की राशि उपलब्ध है. इसी तरह महाराष्ट्र (Maharashtra) में 288 विधायकों को कुल 1440 करोड़, राजस्थान में 200 विधायकों को 1000 करोड़, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में 21 करोड़ और 33 करोड़ रुपए मिलते हैं.
किन राज्यों में नहीं है विधायक निधि?
देश के कई राज्यों में विधायक निधि की व्यवस्था नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक- हरियाणा, पंजाब और सिक्किम जैसे राज्यों में यह व्यवस्था नहीं है. हरियाणा (Haryana) में पहले विधायकों को सालाना 5 करोड़ रुपए मिला करते थे, लेकिन साल 2019 में यह बंद हो गया. इसी तरह पंजाब (Punjab) में पिछले साल CM भगवंत मान ने विधायकों को 10 करोड़ सालाना विधायक निधि देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इस स्कीम पर बात नहीं बन पाई.
केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो सिर्फ दिल्ली और पुडुचेरी ही बस दो ऐसे UTs हैं, जहां विधायक निधि की राशि मिलती है.
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आबादी के अनुसार क्या हाल?
जिन राज्यों में विधायक निधि की व्यवस्था है, वहां भी आबादी के अनुसार असमानता की स्थिति है. मसलन- उत्तर प्रदेश भले ही देश का सबसे बड़ा सूबा हो लेकिन पर कैपिटा निधि के मामले में सबसे पीछे हैं. यहां हर एक लाख की आबादी पर सिर्फ 85 लाख रुपए विधायक निधि है. इसी तरह बंगाल में एक लाख की आबादी पर महज 18 लाख रुपए की राशि है.

गोवा-मिजोरम आगे
इस मामले में मिजोरम और गोवा बहुत आगे हैं. मिजोरम, ऐसा राज्य है जहां सर्वाधिक पर कैपिटा राशि है- 6.46 करोड रुपए उपलब्ध है. तो वहीं, गोवा में 6.35 करोड़ रुपए की राशि मिलती है.
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FIRST PUBLISHED : December 20, 2023, 10:25 IST





