
जाने माने चुनावी विश्लेषक तीन राज्यों राजस्थान, मध्य-प्रदेश और छतीसगढ़ में हालिया हुए चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत का श्रेय सिर्फ़ और सिर्फ़ PM मोदी जी को दे रहे हैं, सही भी है. ‘मोदी की गारंटी’ का जादू सब के सिर चढ़ कर बोला और ख़ास तौर पर महिलाओं के सिर पर. महिलाओं ने तो जैसे उन्हें अपना मसीहा और पालनहार मान लिया है. गौरतलब है कि इस बार महिला वोटरों का turnout पिछले चुनावों की तुलना में कहीं अधिक था. इस एक अकेले कारक ने सारे चुनावी समीकरण बदल दिए यह कहना न्यूनोक्ति होगा. मतदान में महिलाओं के बढ़-चढ़ के भाग लेने से मुक़ाबला भाजपा के पक्ष में कमोबेश एकतरफ़ा हो गया.
राजस्थान के चुनाव में इस बार पुरुषों की तुलना में महिलाओं का टर्नआउट अधिक रहा है. पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत जहां 74.53 फीसदी रहा, वहीं महिला मतदाताओं में से 74.72 फीसदी ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. मध्य प्रदेश में भी यह आंकड़ा 78.21% बनाम 76% रहा जो पुरुषों के मुक़ाबले कम है, लेकिन महिला मतदान में पिछले चुनाव 2018 की तुलना में 2% ज़्यादा है. छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 50 विधानसभा क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा मतदान किया. 7 और 17 नवंबर को हुए दो चरणों में मतदान के आंकड़ों के अनुसार, मतदान में कुल एक करोड़ 55 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसमें 77 लाख 48 हजार पुरुष मतदाता और 78 लाख 12 हजार महिला मतदाता शामिल रहीं.
कमोबेश सारांश यह है कि महिलाएं अब अपने मताधिकार का प्रयोग बढ़-चढ़ कर कर रही हैं और बहुत जोश और जज़्बे के साथ कर रही हैं. कुछ तो वजह होगी जिस के चलते नारी इतनी जागरूक और प्रबुद्ध हुई है.
वजह साफ़ है- पहली बार किसी सरकार ने औरत के प्रति ‘संवेदना’ जताई है.
समाज में नारी का स्थान –
जयशंकर प्रसाद ने समाज में नारी के स्थान के विषय में जो लिखा था वो सिर्फ़ कल्पना की उड़ान और हक़ीक़त से कोसों दूर जैसा लगता है-
“नारी! तुम केवल श्रद्धा हो
विश्वास-रजत-नग पगतल में.
पीयूष-स्रोत-सी बहा करो
जीवन के सुंदर समतल में”
वास्तविकता इस से कहीं दूर या शायद बिलकुल इस के विपरीत है जिसकी बानगी राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने प्रस्तुत की थी –
“अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी,
आंचल में है दूध और आंखों में पानी”
लेकिन अब ऐसा नहीं है. आज के परिदृश्य में नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और सशक्त हो रही है. मोदी सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं ने इस दिशा में बेहतरीन काम किया है.
बिंदुवार बात करें तो –
मोदी जी और उनकी सरकार की योजनाओं ने ‘अबला’ नारी को ‘सबला’ बनाया है, उस की परेशानियों और कष्टों को समझा है और उनका समाधान किया है. मोदी जी ने इस देश की महिलाओं को सही मायनों में empower किया है, सशक्त किया है. सवाल है कैसे?
समाज में कौन सा तबका शक्तिशाली होता है, वो जिसके पास पैसा हो. Empowerment का सबसे बड़ा आयाम, वित्तीय स्वतंत्रता (financial independence) होती है और मोदी जी ने इस देश की करोड़ों महिलाओं को रुपये-पैसे की सहूलियत प्रदान की है. क्या आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि एक-एक पैसे के लिए अपने पिता, पति या बेटे पर आश्रित महिला को कितनी ख़ुशी मिलती होगी जब DBT के ज़रिए सरकारी ख़ज़ाने से पैसा उसके नाम आता हो? जब प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर महिला के नाम किया जाता हो. मोदी जी की योजनाओं ने घर के सबसे ज़्यादा अंडर-रेटेड सदस्य का अचानक वजूद बढ़ा दिया! यह मामूली बात नहीं है जनाब, यह एक क्रांति है, आमूल चूल परिवर्तन है जो सरकार के प्रश्रय के बिना घर वालों को भी हज़म नहीं होता. होता भी कैसे- कुरीति को जब सदियों का पालन-पोषण मिल जाए तो वह परम्परा की शक्ल ले लेती है. फिर मैं और आप उसे सहज ही स्वीकार भी करते हैं और जाने-अनजाने प्रोत्साहित भी.
मोदी जी की महिलापरक योजनाएं उसके दैनिक जीवन को आसान बनाती हैं. चूल्हे के धुएं से अपने फेफड़ों को गलाती महिला की व्यथा अब तक किसी नेता को न समझ आई? ‘उज्ज्वला योजना’ ने औरतों के जीवन को कितना आसान बनाया है ये समझने के लिए एक बार चूल्हे को सुलगा कर और उसमें फूंकनी से हवा मार कर तो देखिए! आटे-दाल का भाव पता चल जाएगा, शायद नानी भी याद आ जाए! अब तक के नेताओं से ज़्यादा समझदार और संवेदनशील तो वो छोटा बच्चा हामिद था जो मेले से अपने लिए खिलौने लाने की बजाय, अपनी बूढ़ी दादी के लिए एक अदद चिमटा ख़रीद के लाया जिससे रोटी बनाते वक्त उस बुढ़िया के हाथ न जलें. संदर्भ आप सब जानते हैं, फिर भी वर्णन कर दूं – मुंशी प्रेमचंद की मर्म-स्पर्शी कहानी ‘ईदगाह.’
अपनी ज़रूरतों को सबसे पीछे रख कर घर चलाने वाली महिला गणित जानती हो या नहीं, इतना हिसाब-किताब अवश्य जानती है कि घर खर्च के लिए उसे दिया गया पैसा पूरे महीने ज़रूर चल जाता है. अर्थशास्त्री ऐसा कहते हैं कि देश के GDP calculation में एक ख़ामी है वो यह कि इसमें महिलाओं द्वारा घर में किए गए कार्य की कोई monetary value (मौद्रिक मूल्य) नहीं लगाई जाती. लगेगी भी कैसे- न उसके कोई fixed working hours हैं, न कोई job-description, न ही कोई overtime. वो घर का shock-absorber है जिसकी मौजूदगी का अहसास तब होता है जब वो काम न करे यानी working condition में न हो. अन्यथा, वो बस है. उसका होना कुछ भी नहीं और न होना, सब कुछ है. हाशिए पर रखी ऐसी प्रजाति के बारे में जब कोई सोचता है और दिल से सोचता है तो बस वो हर्षातिरेक से विह्वल हो उठती है, फिर वो अपने पालनहारे के लिए वोटिंग बूथ तक जाना तो क्या, दुर्गम पहाड़ भी लांघ सकती है. अबला नारी को दुर्गा बनते देर नहीं लगती.
घर में शौचालय बनवा कर मोदी जी ने महिलाओं की अस्मिता की भी रक्षा की है. किसी भी व्यक्ति चाहे पुरुष हो यया महिला, उसके लिए यह इतनी मूलभूत ज़रूरत है कि अचरज होता है कि आज तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? इन सब योजनाओं ने महिलाओं के जीवन को आसान और सरल बनाया है. और रोज़मर्रा के जीवन में सुगमता बहुत बड़ी चीज़ है. ज़िंदगी का लुत्फ़ ही छोटी-छोटी बातों में है.
“हर घर जल’ मिशन के कारण अब महिलाओं को पानी भरने के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ता. महिला के समय की बचत होगी तो वो दूसरे productive काम जैसे बच्चों की पढ़ाई या स्वयं के किसी शौक़ में समय लगा सकती है. राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त तो सिर्फ़ उसकी ‘आंखों में पानी’ देख कर द्रवित हो गए थे, उसके ‘हाथों में पानी’ देख कर कविवर न जाने क्या कह जाते.
मोदी सरकार एक अन्य योजना लाई है जिसके अंतर्गत महिलाओं को फ्री सिलाई मशीन प्रदान की जाती है. अब महिलाएं आसानी से घर बैठे रोजगार प्राप्त कर सकती हैं और जीवन का गुजर-बसर कर सकती हैं. अपना कमाया हुआ पैसा आपको कई ऐसे शौक़ पूरा करने का साहस देता है जिनके बारे में कल तक आप सोच भी नहीं सकते थे. और इसके साथ ही बढ़ता है आत्म-सम्मान और आत्म-विश्वास.
मोदी जी नारी के जीवन के हर पहलू में सुधार लाने वाले कदम उठाते हैं. वे राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान बढ़ाने के लिए भी कटिबद्ध हैं. Women Reservation Act 2023 (नारी शक्ति वंदना अधिनियम, 2023) देश में महिलाओं की संसदीय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने वाला महिला आरक्षण विधेयक अब कानून बन गया है. इसके साथ ही लोकसभा और देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हो गई हैं.
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिए गए महिला केंद्रित फैसलों में से एक बहुत ही अहम क़ानून, तीन तलाक कानून भी रहा है. इस कानून ने न सिर्फ मुस्लिम समाज में व्याप्त बुराइयों को खत्म किया है, बल्कि मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी को खूबसूरत भी बनाया है. ट्रिपल तलाक कानून ने भारत की 8 करोड़ मुस्लिम महिलाओं को यह अधिकार दिया है कि वो मजहब के नाम पर तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ सकती हैं. इसका असर भी देखने को मिला है. देश में तलाक के मामले में 80 फीसदी की बड़ी कमी आई है. गौरतलब है मुस्लिम धर्मगुरुओं के पुरज़ोर विरोध के बावजूद भाजपा सरकार यह क़ानून लाई.
एक ख़ास बात यह है कि मोदी जी अपने भाषणों में स्त्री को बहुत सम्मान देते हैं. पिछले स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से भाषण देते समय उन्होंने कहा था-
“मैं एक पीड़ा जाहिर करना चाहता हूँ … वो है किसी न किसी कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आई है, हमारी बोल चाल, हमारे शब्दों में… हम नारी का अपमान करते हैं. क्या हम स्वभाव से, संस्कार से रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं. नारी का गौरव राष्ट्र के सपने पूरे करने में बहुत बड़ी पूंजी बनने वाला है. ये सामर्थ्य मैं देख रहा हूं.”
एक अन्य भाषण में उनका कहना था- “परिवार के साथ ही राष्ट्र जीवन में भी महिलाओं की अहमियत दिख रही, ये हमारे लिए गर्व की बात है.”
Information technology के जमाने में ये शब्द हर महिला के कानों तक पहुंचते हैं और उसके अंतःकरण को आह्लादित करते हैं. समाज के पुरुष वर्ग तक भी यह संदेश पहुंच जाता है और क्योंकि यह देश के PM की तरफ़ से आता है तो इसका वजन और बढ़ जाता है.
इन चुनावी नतीजों के बाद अपने भाषण में मोदी जी ने कहा, “नारी शक्ति का विकास बीजेपी के विकास का अहम स्तंभ है… रैलियों में, मैं अक्सर कहता था कि इन चुनावों में नारी शक्ति ये ठानकर निकली है कि भाजपा का परचम लहराएगी. और जब देश की नारीशक्ति किसी का सुरक्षा कवच बन जाए, तो कैसी भी ताकत उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती.”
और महिलाओं ने मोदी जी के भरोसे को टूटने नहीं दिया.





