
हिंदी के जनवादी दस्ते के कवि गीतकार नचिकेता नहीं रहे. आज जैसे ही यह खबर बाहर आई, फेसबुक पर उनके नाम श्रद्धांजलियां अर्पित होने लगीं. इन दिनों मंडी में रह रहे यश मालवीय का फोन आया कि नचिकेता के न रहने की खबर है. यह सुनकर मन एकाएक स्तब्ध हो गया. वे मेरे अग्रजों में थे तथा पटना की तैनाती के दौरान उनका अप्रतिम सान्निध्य मिला. वे इंजीनियर थे तथा विज्ञान की दुनिया से हिंदी साहित्य की ओर खिंच कर चले आए थे. यांत्रिक अभियांत्रिकी में उन्होंने स्नातक की उपाधि हासिल की थी तथा झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग में मेकेनिकल इंजीनियर के पद से सेवा निवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन में संलग्न थे.
नचिकेता पिछले कुछ सालों से शारीरिक रूप से अस्वस्थ थे. लेकिन रुग्णता के बावजूद वे गीत लेखन और उसकी आलोचना समीक्षा की ओर अग्रसर रहे. उन्होंने गीत के साथ उनकी समीक्षा का बीड़ा तब उठाया जब देखा कि नई कविता के समर्थक आलोचकों की निगाह गीत पर नहीं है या वे उसे निम्नतर दृष्टि से देखते हैं. गीत रचना की नई जमीन तथा शिनाख्त गीत संबंधी आलोचनात्मक कृतियों के जरिए उन्होंने आज के समय में गीतों व जनगीतों का वैशिष्ट्य रेखांकित किया.
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FIRST PUBLISHED : December 19, 2023, 19:59 IST





