
हाइलाइट्स
मार्गशीर्ष अमावस्या वाले दिन दो धृति योग और अनुराधा नक्षत्र हैं.
अमावस्या को स्नान के बाद पितरों को जल से तर्पण देने का विधान है.
Margashirsha Amavasya 2023: मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या होती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है. इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या 12 दिसंबर मंगलवार को मनाई जाएगी, जोकि साल की अंतिम अमावस्या है. इस दिन मंगलवार पड़ने की वजह यह भौमवती अमावस्या है. क्योंकि, मंगलवार को भौम भी कहा जाता है. ऐसे में इसबार पितरों की आत्मा की शांति और पितृ दोष दूर करने के लिए हनुमान जी भी पूजा की जाएगी. शास्त्रों के मुताबिक, इस पवित्र दिन कुछ आसान उपाय करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आ सकती है. आइए उन्नाव के ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री से जानते हैं मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितृ दोष दूर करने के उपायों के बारे में-
मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितृ दोष दूर करने के 5 आसान उपाय
पवित्र नदियों में स्नान करें: मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. हालांकि, इसबार यह तिथि मंगलवार को पड़ने से बजरंगबली की भी पूजा की जाएगी. इसलिए सुबह उठकर पवित्र नदी में स्नान करें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. ध्यान रहे कि, जल में तिल जरूर प्रवाहित करें. साथ ही गायत्री मंत्र का जाप करें. इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की भी पूजा की जाती है.
पितरों को जल से तर्पण दें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि को स्नान के बाद पितरों को जल से तर्पण देना चाहिए. पितरों का स्मरण करके हाथ में कुश की पवित्री धारण करते हैं, फिर काले तिल और जल से पितरों के लिए तर्पण करते हैं. ऐसा करने से नाराज पितर खुश होते हैं.
त्रिपिंडी श्राद्ध कराएं: ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, पितृ दोष से मुक्ति के लिए आप मार्गशीर्ष अमावस्या पर त्रिपिंडी श्राद्ध करा सकते हैं. इसको विधिपूर्वक कराने से तीन पीढ़ियों के पितर खुश होते हैं. उनके आशीर्वाद से सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है.
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पंचबलि कर्म कराएं: मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन आप पितरों को प्रसन्न करने के लिए पंचबलि कर्म कर सकते हैं. इसमें पितरों के लिए भोजन बनाते हैं. फिर उसे गाय, कौआ, कुत्ता, देव आदि को अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचबलि कर्म करने से भोजन पितरों को प्राप्त होता है. वे खुश होकर अपने वंश को आशीर्वाद देते हैं.
अर्यमा देव की पूजा करें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या को स्नान करने के बाद पितरों के देवता अर्यमा की पूजा जरूर करनी चाहिए. उस दौरान पितृ सूक्त का पाठ करें. इससे आपके पितर प्रसन्न होंगे.
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Tags: Astrology, Dharma Aastha, Festival, Religion
FIRST PUBLISHED : December 11, 2023, 19:31 IST





