
एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्मों के लिए इरशाद कामिल को फिल्मफेयर सहित कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. इरशाद की नज्मों का संग्रह ‘एक महीना नज्मों का’ प्रकाशित हुई है. प्रस्तुत है इसकी संग्रह की कुछ सज्में-
चलो मोहब्बत की बात करें
अब
मैले जिस्मों से ऊपर उठ कर
भूलते हुए कि कभी
घुटने टेक चुके हैं हम
और देख चुके हैं
अपनी रूह को तार तार होते
झूठे फख्र के साथ
चलो मोहब्बत की बात करें
जिंदगी के पैरों तले
बेरहमी से रौंदे जाने के बाद
मरहम लगाएं जख़्मी वजूद पर
जो शर्म से आंखें झुका कर
बैठा है सपनों के मज़ार पे
इस से बुरी कोई बात नहीं कर सकते
हम अपनी ही जिद में
धोका दे चुके हैं अपने-आप को
खेल चुके हैं खुद अपनी इज़्जत से
भोग चुके हैं झूट को सच की तरह
अब
इन हालात में
कोई गैर-जरूरी बात ही कर सकते हैं हम
आओ मोहब्बत की बात करें
—
मैं तुम्हें एक खत लिखूंगा
मगर उसे डाक में नहीं डालूंगा
मैं बनाऊंगा उस की एक नाव
जिस पे सवार कर के अपनी सोच
ठेल दूंगा बरसात के पानी में
तुम्हारी ओर
तुम भी एक खत लिखना
जवाबी
मगर उसे डाक में मत डाल देना
नाव पहुंचने से पहले ही
जब डूब जाएगी
तुम तक नहीं पहुंच पाएगी
मेरी सोच
तुम झुझलाना मुझ पर
और गुस्से में आ कर
फाड़ देना उस खत को
जो तुम ने अभी नहीं लिखा
—
न दोस्ती न दुश्मनी
मेरा काम तो है रोशनी
मैं रास्ते का चराग हूं
कहो सर-फिरी हवाओं से
न चलें ठुमक-अदाओं से
कभी फिर करूंगा मोहब्बतें
अभी सामने हैं ज़ुल्मतें
ये अंधेरा पहले नोच लूं
कोई चाल अगली सोच लूं
मैं गुम हूं अपने ख़याल में
ये जान लो कि इस लम्हे
मैं दिल नहीं दिमाग हूं
मैं रास्ते का चराग हूं
मेरा काम तो है रोशनी
न दोस्ती न दुश्मनी
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Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature
FIRST PUBLISHED : December 7, 2023, 16:01 IST





