यह दुर्भाग्यपूर्ण है… जब हाईकोर्ट ने यह कहते हुए लाइव स्‍ट्रीमिंग पर लगाई रोक, जानें इस फैसले की वजह

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधा के दुरुपयोग का संकेत देने के बाद मंगलवार को अपनी अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग को निलंबित कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश पीबी वराले ने मंगलवार सुबह अदालत में इस कदम की घोषणा की और इससे ठीक पहले उनकी अध्यक्षता वाली कोर्ट रूम में लाइव स्ट्रीम या वीडियो-कॉन्फ्रेंस स्ट्रीम अचानक रोक दी गई थी. मुख्‍य न्‍यायाधीश ने कहा क‍ि लाइव स्‍ट्रीम‍िंग का उद्देश्य सभी हितधारकों से सहयोग करने का आग्रह करते हुए न्यायिक संस्था को संरक्षित करना है.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा क‍ि हम सभी लाइव स्ट्रीमिंग रोक रहे हैं. वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग की हम अनुमति नहीं दे रहे हैं. दुर्भाग्य से, कुछ शरारत की जा रही है, टेक्‍नोलॉजी या कुछ लोगों के स्तर पर यह हो सकता है. तुरंत कोर्ट रजिस्ट्री में न जाएं और शिकायत न करें. हमारी अनुमति क्यों नहीं ली गई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है, यह स्थिति एक अभूतपूर्व स्थिति है. अन्यथा, कर्नाटक हाईकोर्ट हमेशा बड़े पैमाने पर जनता के लिए टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करने के पक्ष में था, लेकिन यह स्थिति जो अभूतपूर्व है. कृपया सहयोग करें, कृपया अपने सहयोगियों से अनुरोध करें कि वह जल्दबाजी न करें. कंप्यूटर टीम, रजिस्ट्री यह सिस्टम के हित में है, बल्कि संस्था के भी. भले ही प्रेस के कुछ सदस्यों को इसकी जानकारी न हो कृपया उन्हें बताएं. आपको सहयोग करना होगा.

मेरे करियर को भी बर्बाद… क्‍यों हाईकोर्ट में राखी सावंत ने दी यह दलील? जानें क्‍या है पूरा बवाल

हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने बताया है क‍ि साइबर सुरक्षा कारणों से कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंगलुरु, धारवाड़ और कालाबुरागी की सभी तीन पीठों में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को फिलहाल निलंबित किया जा रहा है. इससे एक द‍िन पहले जूम मीटिंग (जिसके माध्यम से अदालती कार्यवाही को लाइव-स्ट्रीम किया जा रहा था) को मॉडरेट करने वाले एडम‍िन की तरह से शाम‍िल होने वाले लोगों को सूचित किया गया क‍ि उन्हें वर्चुअल मीटिंग में बने रहने के लिए अपना नाम और उस मामले के आइटम नंबर को बताना होगा. हालांकि, न्यायाधीशों के बेंच पर बैठने के बाद यह सूचित किया गया कि लाइव स्‍ट्रीम‍िंग के जर‍िए होने वाली सुनवाई को पूरी तरह से निलंबित क‍िया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वप्निल त्रिपाठी मामले में अपने 2018 के फैसले के साथ संवैधानिक महत्व के मामलों में अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग की अनुमति देने के बाद अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग को बढ़ाया गया. इसके बाद में COVID-19 महामारी ने देशभर में कोर्ट में पेश होकर सुनवाई पर रोक लगा दी, जिससे अदालतों को दूसरा तरीका खोजने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद कोर्ट में लाइव स्‍ट्रीम‍िंग जैसे माध्‍यमों पर जाना पड़ा.

अलग-अलग हाईकोर्ट में समय के साथ यूट्यूब, जूम, वीबेक्स, गूगल मीट और अन्य ऐप्स का उपयोग करना शुरू कर दिया, ताकि वकीलों और मामले से जुड़े अन्‍य लोगों तक अदालत की सुनवाई तक पहुंच बनाई जा सके. हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने भी महामारी कम होने के बाद अदालती सुनवाई की वर्चुअल पहुंच बंद करने के लिए हाईकोर्ट को फटकार लगाई थी.

Tags: High court, Live Streaming

Source link

Leave a Comment