Rajasthan Politics: मंत्रिमंडल की दौड़ में शामिल 33 नेताओं का क्या है आधार, जानें क्यों बने हुए हैं रेस में?

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हाइलाइट्स

राजस्थान में मंत्री पद की रेस
रेस में शामिल नेताओं के ये हैं समीकरण
मंत्रिमंडल में अधिकतम कुल 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं

जयपुर. राजस्थान में सत्ता में लौट रही बीजेपी में सीएम पद और मंत्री पद की दौड़ में नित नए नामों की चर्चाएं सामने आ रही हैं. मंत्रिमंडल की दौड़ में संभावित चेहरों को लेकर कयासों का दौर चल रहा है. इसके पीछे अलग-अलग तर्क और दावे किए जा रहे हैं. किसी की लंबी राजनीतिक पृष्ठभूमि को अहम बताया जा रहा है तो किसी को संघ और संगठन में अहम पैठ को आधार बताया जा रहा है. वहीं किसी के लिए जीत का अंतर और इलाके में इलाके में पैठ का आधार बताया जा रहा है. किसी को सोशल इंजीनिरिंग के हिसाब से फिट बताया जा रहा है.

मंत्री पद की रेस में शामिल दीया कुमारी एक बार सासंद और एक बार विधायक रह चुकी है. वे दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं. वे जयपुर के पूर्व राजपरिवारके सदस्य हैं. इसके साथ ही इन चुनावों में सबसे ज्यादा 71 हजार 368 वोटों से जीत दर्ज की है.  राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ लगातार दो बार से जयपुर ग्रामीण से सांसद हैं. वे पूर्व में एक बार केन्द्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं. बाबा बालकनाथ अलवर के सांसद हैं. वे पहली बार विधानसभा में पहुंचे हैं. वे नाथ संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिससे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं. बाबा बालकनाथ राजस्थान में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता की छवि रखते हैं.

Rajasthan Politics: मंत्रिमंडल की दौड़ में शामिल 33 नेताओं का क्या है आधार, जानें क्यों बने हुए हैं रेस में?

पुष्पेन्द्र सिंह राणावत बाली से छठी बार विधायक बने हैं
वासुदेव देवनानी लगातार पांचवीं बार विधायक बने हैं. वे पहले भी भाजपा सरकार के दौरान मंत्री रहे हैं. वे 12वीं,13वीं,14वी और 15वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं. अनिता भेदल भी लगातार पांचवीं बार विधायक बनी हैं. वे पहले भी भाजपा सरकार मंत्री रही हैं. वे 12वीं,13वीं,14वीं और 15वीं विधानसभा के सदस्य रही हैं. पुष्पेन्द्र सिंह राणावत बाली विधानसभा सीट से लगातार 6 बार विधायक चुने गए हैं. वे 11वीं,12वीं,13वीं,14वीं,15वीं और अब 16वीं विधानसभा के सदस्य चुने गए हैं. पूर्व में भाजपा सरकार के समय ऊर्जा मंत्री रहे हैं. प्रताप सिंह सिघवीं सात बार के विधायक हैं. वे भाजपा सरकार के दौरान यूडीएच मंत्री भी रहे हैं.

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विश्वनाथ ने गोविंद मेघवाल को हराया है
डॉ विश्वनाथ मेघवाल तीसरी बार विधायक चुने गए हैं. वे 13वीं और 14वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं. वे गहलोत सरकार के कैबिनेट मंत्री गोविन्द मेघवाल को शिकस्त देकर विधानसभा में पहुंचे हैं. संदीप शर्मा लगातार तीसरी बार कोटा दक्षिण से चुनाव जीतते आ रहे हैं. उन्हें ब्राह्मण कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है. इस वर्ग से संजय शर्मा या बालमुकुन्दाचार्य का नाम भी शामिल किया जा सकता है. इसके पीछे फायर ब्रांड चेहरे रूप में पहचान मिल रही है.

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किरोड़ीलाल मीणा छठी बार विधायक बने हैं
जोगेश्वर गर्ग पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं. वे 9वीं,10वीं,12वीं और 15वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं. वे पूर्व में भाजपा सरकार में मंत्री रहे हैं. सिद्धी कुमारी बीकानेर के पूर्व राजपरिवार से है. वे चौथी बार लगातार जीत कर विधानसभा में पहुंची हैं. झाबर सिंह खर्रा दूसरी बार विधानसभा पहंचे हैं. उनके पिता हरलाल सिंह खर्रा पांच बार विधायक रहे हैं. डॉ. किरोड़ीलाल मीणा 1985 मे पहली बार विधायक बने हैं. वे अब तक छह बार विधायक बन चुके हैं. इसके अलावा दो बार लोकसभा सदस्य और अभी राज्यसभा से सांसद हैं.

बीजेपी फायर ब्रांड नेता हैं मदन दिलावर
मदन दिलावर छठी बार विधायक बने हैं. उनकी फायर ब्रांड नेता के रूप में पहचान है. संघ पृष्ठभूमि से आते हैं. भाजपा सरकारों के समय मंत्री भी रहे हैं. कन्हैयालाल मालपुरा से विधायक हैं. लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करवाई है. निर्विवाद नेता की छवि है. श्रीचंद कृपलानी चौथी बार विधायक बने हैं. दो बार लोकसभा सदस्य रहे हैं. भाजपा सरकार में यूडीएच मंत्री रहे हैं. जितेन्द्र गोठवाल दूसरी बार विधायक बने हैं. भाजपा सरकार नें संसदीय सचिव रहे हैं. हरि सिंह रावत, शंकर सिंह रावत और सुरेश रावत में से रावत समाज को साधने के लिए तीनों में से किसी को मंत्री बनाया जा सकता है.

भजनलाल शर्मा युवा चेहरा है
अमृत लाल मीणा ने सलूम्बर से तीसरी बार जीत दर्ज की है. मेवाड़ में आदिवासियों को साधने के लिए उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है. भजनलाल शर्मा पहली बार सांगानेर से जीत दर्ज करवाकर विधानसभा में पहुंचे है. उन्हें संघ पृष्ठभूमि का फायदा मिल सकता है. जगत सिंह तीसरी बार विधानसभा में पहुंचे हैं. वे भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं. इसके साथ ही कद्दावर नेता रहे नटवर सिंह के पुत्र हैं. बाबू सिंह राठौड़ जोधपुर जिले के शेरगढ़ से चौथी बार विधायक बने हैं.

गुरवर सिंह शादुलशहर से जीतकर आए हैं
सुमित गोदारा लूणकरणसर से दूसरी बार विधायक बने हैं. विधानसभा में लगातार सक्रिय रहते हैं. गुरवर सिंह शादुलशहर से जीतकर आए हैं. सिख समाज से आते हैं. डॉ. जसवंत यादव चौथी बार विधायक बने हैं. वे एक बार अलवर से लोकसभा सदस्य रहे हैं. भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. कैलाश वर्मा बगरू विधानसभा से दूसरी बार विधायक बने हैं।. भाजपा सरकार में संसदीय सचिव रहे हैं. यूथ होने के कारण मौका मिल सकता है. कुलदीप धनखड़ विराट नगर से पहली बार चुने गए हैं. लेकिन पार्टी के संगठन में रहने का कारण जगह मिल सकती है.

अजय सिंह कीलक डेगाना से तीसरी बार विधायक बने हैं
शत्रुघ्न गौतम केकड़ी से कांग्रेस के डॉ. रघु शर्मा का हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं. भाजपा सरकार में संसदीय सचिव रह चुके हैं. ताराचन्द जैन उदयपुर से पहली बार जीत दर्ज की है. जैन समाज के कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है. दीप्ति किरण माहेश्वरी भाजपा की कद्दावर नेता रही किरण माहेश्वरी की पुत्री हैं. वे दूसरी बार विधानसभा में पहुंची हैं. जोराराम कुमावत दूसरी बार विधायक बने हैं. कुमावत समाज के कोटे से मंत्री बन सकते हैं. अजय सिंह कीलक डेगाना से तीसरी बार विधायक बने हैं. भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. ओटाराम देवासी भी तीसरी बार विधायक बने हैं. पूर्व में बीजेपी सरकार में मंत्री रहे हैं.

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