
साहित्य जगत से निराशाभरी खबर है. वयोवृद्ध वरिष्ठ साहित्यकार रामदरश मिश्र की धर्मपत्नी सरस्वती का आज निधन हो गया. उन्होंने नई दिल्ली के द्वारका में अपने निवास स्थान पर सुबह चार बजे अंतिम सांस ली. वे 92 साल की थीं और जरा रोग से ग्रसित थीं. उनके बेटे शशांक मिश्र से सोशल मीडिया पर यह शोक संदेश साझा किया है. उनके परिवार में दो पुत्र शशांक मिश्र, विवेक मिश्र, बेटी डॉ. स्मिता मिश्र और अंजलि तिवारी शामिल हैं. डॉ. रामदरश मिश्र अपने जीवन के 100वें वर्ष में चल रहे हैं और पूरी तरह से सक्रिय रूप से साहित्यिक गतिविधियों में शामिल होते रहते हैं.
साहित्य जगत ने सरस्वती जी के निधन पर शोक व्यक्त किया है. वरिष्ठ गीतकार और भाषाविद् डॉ. ओम निश्चल ने लिखते हैं- उन्हें जब देखा रामदरश जी के साथ देखा. उन्हें सुनते और गुनते हुए देखा. कोई घर आता तुरंत आवभगत कर आकर उनके पास बैठ जातीं. बातें करती बातें सुनतीं. रामदरश जी ने उन पर एक उपन्यास भी लिखा- ‘एक बचपन यह भी’.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर डॉ. जसवीर त्यागी ने बताया कि रामदरश मिश्र से उनका बहुत पुराना पारिवारिक संबंध रहा है. वे समय-समय पर उनके घर पर जाते रहे हैं. डॉ. त्यागी ने बताया कि सरस्वती जी अपने अंतिम समय तक सक्रिय रही हैं और हर साहित्यिक गतिविधि में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती रही हैं.
रामदरश मिश्र और सरस्वती जी ने कुछ समय पहले ही अपने विवाह की 75वीं वर्षगांठ मनाई थी. उनका विवाह 1948 में हुआ था.
वरिष्ठ बाल साहित्यकार दिविक रमेश ने फेसबुक पर सरस्वती जी के साथ अपने संस्मरण साझा करते हुए शोक संदेश लिखा है- “आदरणीया श्रीमती सरस्वती मिश्र ने इहलोक से विदाई ली. उनकी परम आत्मीय आत्मा को नि:संदेह शांति मिलेगी. संतप्त परिवार को, खासकर गुरुवर रामदरश मिश्र जी को अपने जीवन साथी के असह्य बिछोह को सहने की शक्ति मिले.”
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FIRST PUBLISHED : December 3, 2023, 10:23 IST





