रईसों के दून स्कूल को टक्कर देता यह सरकारी विद्यालय, निकल चुके हैं सैकड़ों IAS-IPS, फीस-00!

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मौजूदा वक्त में देश के हर राज्य में सरकारी स्कूलों की हालत बदतर बताई जाती है. दूसरी तरफ प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में दाखिले की मारामारी और अधिक फीस से आम लोग परेशान हैं. लेकिन, आज इन दोनों से इतर एक ऐसे सरकारी स्कूल की चर्चा करते हैं जिसे आम लोगों का ‘दून स्कूल’ कहा जाता है. खूबसूरत पहाड़ियों के बीच सैकड़ों एकड़ क्षेत्र में फैला यह स्कूल करीब सात दशक से अपनी प्रतिष्ठा को ज्यों का त्यों बचाकर रखा है. कहने को तो यह एक राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूल है, लेकिन यहां पठन-पाठन का स्तर प्रतिष्ठित दून स्कूल से कमतर नहीं है. आप इस स्कूल में अध्यापन की गुणवत्ता का अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि यहां से पढ़ाई करने वाले बच्चे देश ही नहीं विदेश में भी कई प्रतिष्ठित पदों पर अपनी माजूदगी दर्ज करवा चुके हैं.

यहां के सैकड़ों बच्चें देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा यूपीएससी पास कर भारत सरकार के शीर्ष पदों पर तैनात हैं. इतना ही नहीं, इतनी सारी खूबियों वाले इस स्कूल में कोई फीस नहीं लगती. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कौन सा सरकारी स्कूल है. तो इसका नाम है नेतरहाट आवासीय विद्यालय. यह झारखंड राज्य में स्थित है. इस स्कूल की स्थापना 1954 में एकीकृत बिहार राज्य में की गई थी. इसके पहले प्रिंसिपल थे चार्ल्स नेपियर.

दरअसल, आजादी के बाद के दिनों में यह महसूस किया गया कि देश में कुछ ऐसे स्कूल होने चाहिए जहां से पढ़ाई करने वाले बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता हो. उस वक्त तक देश में ऐसे स्कूलों की कमी थी. इस मसले पर काफी विचार विमर्श हुआ. फिर 1952 में बिहार सरकार के पास एफ. जी. पीयर्स (फ्रेडेरिक गोर्डन पीयर्स) स्कीम लाया गया. दरअसल, एफ. जी. पीयर्स उस वक्त के देश के जानेमाने शिक्षाविद थे. उन्होंने देश में कई प्रतिष्ठित आवासीय स्कूलों की स्थापना करवाई थी.

सुझावों को बिहार सरकार ने स्वीकार कर लिया और 15 नवंबर 1954 को नेतरहाट में आवासीय विद्यालय की स्थापना की गई. स्कूल में पहले साल 60 बच्चों का छह साल के कोर्स के लिए दाखिला हुआ. 1982 से इस स्कूल में हर साल 100 बच्चों का दाखिला होता है. यह स्कूल झारखंड सरकार के मानव संसाधन विभाग द्वारा बनाई गई जनरल बॉडी नेतरहाट विद्यालय समिति के अधीन संचालित होती है. 15 नवंबर 2020 को जब बिहार से अलग झारखंड राज्य की स्थापना हुई तो यह स्कूल झारखंड के हिस्से में आ गया. गर्वनिंग बॉडी में राज्य सरकार के शीर्ष नौकरशाहों के साथ-साथ स्कूल के प्रिंसिपल और कुछ शिक्षक सदस्य होते हैं. यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का रुतबा भी खास है. इन्हें गैजेटेड सरकारी अधिकारी का दर्जा प्राप्त है.

आप इस स्कूल की ख्याति का अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि इस साल यहां से 12वीं पास करने वाले 23 बच्चों ने नीट और जेई एडवांस की परीक्षा पास की. इसके अलावा कई अन्य छात्रों को देश के प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिला मिला.

स्कूल परिसर में 12 खेल मैदान
इस स्कूल में छठी से 12वीं तक की पढ़ाई होती है. बच्चों को मुख्य रूप से हिंदी मीडियम में पढ़ाया जाता है लेकिन, इसके साथ ही अंग्रेजी और संस्कृति भाषा पर खास जोर दिया जाता है. यहां के बच्चे हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी और संस्कृत भाषा में दक्ष होते हैं. इसके अवाला यहां व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष जोर दिया जाता है. सैकड़ों एकड़ में फैसे स्कूल परिसर में बच्चों के सीखने के लिए हर एक चीज मौजूदा है. परिसर की भव्यता का अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि यहां एक-दो नहीं कुल 12 खेल मैदान हैं.

लंबी से पूर्व छात्रों की लिस्ट
इस स्कूल से पढ़ाई करने वाले पूर्व छात्रों की सूची काफी लंबी है. ये छात्र दुनिया में कई शीर्ष पदों को सुशोभित कर चुके हैं. इनमें कुछ नाम हैं- पूर्व गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह. सिंह आईआईटी कानपुर, यूपी बार्कले, आईएसआई कोलकाता में प्रोफेसर थे. सीबीआई के पूर्व निदेशक त्रिनाथ मिश्रा. रिटायर केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रत्युष सिन्हा, सीएट के प्रबंध निदेशक रहे पारस चौधरी, रिजर्व बैंक के डिप्टी डायरेक्ट रहे आनंद सिन्हा, पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे राज बल्लभ सिंह, आईएसएस नगेंद्र नाथ सिन्हा, आईएएस अपूर्व वर्मा, आईआरएस अमिताभ कुमार, आईएएस अरुण कुमार सिन्हा, यूनिवर्सिटी ऑफ मिन्नेसोटा में प्रोफेसर डॉ. शशि शेखर, आईएएस शैलेस कुमार जैसे अनगिनत नाम हैं.

Tags: Government Primary School

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