
नई दिल्ली. पांच राज्यों में वोटिंग खत्म होने के बाद कल एग्जिट पोल के नतीजे सामने आए. मिजोरम के एग्जिट पोल नतीजों में त्रिशंकु विधानसभा का संकेत दिया गया था, अधिकांश सर्वेक्षणकर्ताओं और चुनाव विशेषज्ञों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सहयोगी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) और जोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) के बीच कड़ी टक्कर की भविष्यवाणी की थी. मणिपुर में जातीय तनाव के बावजूद, ‘गुरिल्ला’ सीएम जोरमथांगा को उम्मीद है कि पड़ोसी राज्य के कुछ कुकी-जो समुदाय के सदस्यों को आश्रय देने के लिए उनकी पार्टी के समर्थन को लोगों द्वारा स्वीकार किया जाएगा. एमएनएफ ने ‘जो एकीकरण’ को अपनी चुनावी पिच के रूप में पेश करने की कोशिश की है.
कुछ सर्वेक्षणकर्ताओं ने जेडपीएम के विजेता के रूप में उभरने की भविष्यवाणी की है. पार्टी ने सक्रिय रूप से चुनावी लड़ाई में भाग लिया और अपने संस्थापक और अध्यक्ष लालडुहोमा को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नामित किया है. लालदुहोमा 74 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, जिनकी राजनीतिक यात्रा 1984 में शुरू हुई जब वह लोकसभा के लिए चुने गए. वह दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का सामना करने वाले पहले सांसद बने. उनके आईपीएस करियर में गोवा में स्क्वाड लीडर के रूप में काम करना शामिल था, जहां उन्होंने तस्करों पर कार्रवाई का नेतृत्व किया. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर तब ध्यान आकर्षित किया जब उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सुरक्षा प्रभारी बनाया गया, जिसके कारण 1982 में उनका नई दिल्ली स्थानांतरण हो गया.
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अलगाववादी आंदोलन चला चुके जोरमथांगा
लालदुहोमा ने जेडपीएम की स्थापना की और 2018 के विधानसभा चुनावों में जेडएनपी के नेतृत्व वाले जेडपीएम गठबंधन के पहले सीएम उम्मीदवार चुने गए. उन्हें 2020 में सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने 2021 में उपचुनाव में सेरछिप से फिर से चुनाव जीतकर राजनीति में वापसी की. लालडेंगा ने अलगाववादी आंदोलन चलाया था. वो मिजो नेता और मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के प्रमुख थे. राज्य की बागडोर संभालने से पहले जोरमथांगा राज्य में लालडेंगा के डिप्टी थे. जोरमथांगा ने अपना अधिकांश जीवन भारत सरकार से बचकर म्यांमार, बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन में घूमते हुए बिताया. जोरमथांगा ने अपनी पुस्तक MILARI में लिखा है कि कैसे वह 1972 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान चटगांव के पहाड़ी इलाकों से भाग निकले, जो उन्हें यांगून और फिर कराची और इस्लामाबाद ले गया. 1975 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ उनकी मुलाकात और चीन में लालडेंगा के साथ उनका “गुप्त” मिशन जहां वे चीनी प्रधानमंत्री झोउ एनलाई से मिले.

1986 में शांति समझौते के बाद राजनीति में आई पार्टी
1986 में एमएनएफ और भारत सरकार के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, जोरमथांगा को लगभग छह महीने के लिए लालडेंगा के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था. उन्होंने 1987 में वित्त और शिक्षा विभाग संभाला. 1990 में प्रमुख लालडेंगा की मृत्यु के बाद उन्होंने पार्टी का नेतृत्व किया. एमएनएफ ने 1998 में जोरमथांगा के नेतृत्व में चुनाव जीता, जो तब पहली बार सीएम बने. 40 सीटों वाली मिजोरम विधानसभा के लिए वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी.
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Tags: Indira Gandhi, Mizoram, Mizoram Assembly Elections
FIRST PUBLISHED : December 1, 2023, 16:55 IST





