
Activa Vale MLA Kuldeep Juneja: छत्तीसगढ़ में कुलदीप जुनेजा का नाम लेते ही जो छवि आंखें सामने उभरती है, वह स्कूटी पर बैठे सरदार की होती है. जिसमें एक पैर स्कूटी पर होता है और दूसरा सड़क पर रहता है. पार्षद से विधायक तक के सफर में कुलदीप जुनेजा ने जमीन से अपना पैर नहीं हटाया. रायपुर शहर खासकर उत्तर विधानसभा क्षेत्र का कोई भी शख्स उनके सामने अपनी समस्या रखकर आसानी से मदद हासिल कर सकता है. अपने विधायक को ढूंढने के लिए लोगों को भटकना नहीं पड़ता. सभी को उनका ठिकाना और समय मालूम रहता है.
कुलदीप जुनेजा को लोगों की मदद करने का भाव विरासत में मिला है. रायपुर की कुष्ठ बस्ती उनके परिवार के द्वारा ही बसाई गई है. बड़े भाई बलबीर जुनेजा से ही कुलदीप में सेवा का भाव आया है. बलबीर जुनेजा रायपुर नगर निगम के महापौर रहे हैं. जुनेजा का संयुक्त परिवार है. लगभग पैंतीस सदस्य इस परिवार में हैं. उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र को भी परिवार की तरह माना और सिर पर विधायकी को हावी नहीं होने दिया. पार्षद रहते जिस तरह अपने वार्ड के निवासियों की चिंता करते थे. वैसे ही विधायक रहते कर रहे हैं.
कुलदीप ने चार पहिए वाली बड़ी गाड़ी के बजाय अपनी स्कूटी को आफिस की टेबल-कुर्सी बना लिया. विधानसभा या मंत्रालय जाने के लिए वे भले ही किसी बड़ी गाड़ी से चले जाएं लेकिन, क्षेत्र में स्कूटी साथ रहती है. लेटर पेड और रबर स्टैंप भी हमेशा स्कूटी की डिक्की में ही रही.
रायपुर की जिस उत्तर विधानसभा सीट से कुलदीप जुनेजा कांगे्रस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, वह वीआईपी इलाका माना जाता है. राज्यपाल, मुख्यमंत्री और आला अधिकारी उनके निर्वाचन क्षेत्र के ही वोटर है. इस सीट को मिनी भारत के तौर भी देखा जाता है. सिख, सिंधी, उत्कल समाज, मुस्लिम और ब्राह्णण वोटर लगभग बराबर हैं. कुलदीप जुनेजा पहली बार 2008 में कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए थे. प्रदेश में सरकार भारतीय जनता पार्टी की बनी. असर विकास कार्यों पर पड़ना स्वभाविक था. 2013 में चुनाव हर गए. लेकिन 2018 में चुनाव जीते तो सरकार भी कांग्रेस की बनी. सत्ताधारी दल के विधायक होने के बाद भी उन्होंने अपनी कार्यशैली नहीं बदली. इस बार बड़ी चर्चा थी कि कुलदीप जुनेजा को टिकट नहीं मिलेगा लेकिन, क्षेत्र में लोकप्रियता के चलते पार्टी ने अपनी आखिरी सूची में उन्हें जगह दी.
कुलदीप जुनेजा का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के पुरंदर मिश्रा से हो रहा है. पुरंदर मिश्रा उत्कल हैं. उड़िया समाज के प्रदेशाध्यक्ष हैं. व्यवसाय आयकर सलाहकार हैं. जगन्नाथ रथ यात्रा के कारण मिश्रा काफी लोकप्रिय हैं. अजित जोगी के दौर में कांगे्रस से भी जुड़े रहे हैं. पुरंदर मिश्रा अपने विरोधी उम्मीदवार कुलदीप जुनेजा की स्कूटी की ताकत जानते हैं. यही कारण है कि चुनाव प्रचार में उन्होंने सायकल रिक्शा चलाने में हिचक नहीं दिखाई. वोटर के बीच रिक्शा चलाते हुए प्रचार करने पहुंच जाते. प्रचार की इस शैली से चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है. कुलदीप जुनेजा अपनी सहज उपलब्धता को आगे रखकर ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं.
कुलदीप जुनेजा के जमीन से जुड़े नेता होने के कारण उत्तर रायपुर की यह सीट काफी हाईप्रोफाइल मानी जा रही है. वैसे भी दो बार के विधायक क्षेत्र का बड़ा नेता हो जाता है. कुलदीप जुनेजा की हार-जीत से यह तय होगा कि सड़क की राजनीति को वोटर महत्व देता है कि नहीं.
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FIRST PUBLISHED : December 2, 2023, 13:41 IST





